कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली नई सरकार ने अपना पहला बड़ा प्रशासनिक दांव चल दिया है। राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को राज्य के राजनीतिक और रणनीतिक गलियारों में बेहद अहम माना जा रहा है।
क्यों खास है यह नियुक्ति?
सुब्रत गुप्ता की नियुक्ति न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- चुनाव में अहम भूमिका: हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सुब्रत गुप्ता को केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा विशेष पर्यवेक्षक (Special Observer) नियुक्त किया गया था।
- SIR प्रक्रिया का संचालन: सुब्रत गुप्ता पर चुनाव के दौरान SIR (Special Intervention Report) प्रक्रिया के संचालन और राज्य में हिंसा-मुक्त मतदान सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी थी।
- ममता बनर्जी का विरोध: पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने शुरू से ही चुनाव आयोग की इस SIR प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया था। ऐसे में सुब्रत गुप्ता को नई सरकार में सलाहकार बनाना पूर्ववर्ती सरकार के रुख के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
रणनीतिक नजरिया
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुब्रत गुप्ता का अनुभव नई सरकार के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। चुनाव के दौरान उनकी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पकड़ को देखते हुए सुवेंदु सरकार ने उन पर भरोसा जताया है। यह नियुक्ति संकेत देती है कि नई सरकार राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक मशीनरी में बड़े सुधारों की तैयारी में है।