लखनऊ। साल 2017 में बहराइच के जंगलों से रेस्क्यू की गई भारत की मशहूर ‘मोगली गर्ल’ का 18 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। लखनऊ के निर्वाण राजकीय बाल गृह में रह रही इस अनोखी बच्ची ने फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (लंग्स इन्फेक्शन) के चलते दम तोड़ दिया। उसके आकस्मिक निधन से बालगृह के स्टाफ और उसकी देखभाल करने वाले सेवादारों में गहरा शोक व्याप्त है और पूरे परिसर में खालीपन पसरा हुआ है।
2017 में कतर्नियाघाट के जंगलों में बंदरों के बीच मिली थी
‘मोगली गर्ल’ की कहानी साल 2017 में पूरी दुनिया की सुर्खियों में आई थी। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में गश्त के दौरान पुलिस को एक बच्ची मिली थी, जो पूरी तरह से बंदरों के झुंड के बीच रह रही थी। जब उसे रेस्क्यू किया गया, तो उसका व्यवहार इंसानों जैसा बिल्कुल नहीं था। वह इंसानी भाषा नहीं समझती थी और बंदरों की तरह ही आवाजें निकालती थी।
दो पैरों और दोनों हाथों के बल चलती थी
जंगल में वन्यजीवों के बीच रहने के कारण वह आम बच्चों की तरह सीधी खड़ी होकर नहीं चल पाती थी। वह अपने दोनों हाथों और दोनों पैरों की मदद से जानवर की तरह चलती थी। खाना खाने का उसका तरीका और इंसानों को देखकर आक्रामक हो जाना, उसके इसी वन्य जीवन को दर्शाता था।
‘एहसास’ नाम रखकर किया गया पुनर्वास
जंगल से बचाए जाने के बाद उसे लखनऊ के राजकीय बालगृह में लाया गया, जहाँ उसे ‘एहसास’ नाम दिया गया। सालों तक चले कठिन रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) और थेरेपी के बाद उसमें धीरे-धीरे सुधार होने लगा था। उसने इंसानों के बीच रहना, कपड़े पहनना, चम्मच से खाना और सीधे खड़े होकर चलना सीख लिया था। उसका हिंसक और असामान्य व्यवहार काफी हद तक शांत हो चुका था।
संक्रमण के कारण थमीं सांसें
काउंसलर्स और केयरटेकर की कड़ी मेहनत से ‘एहसास’ सामान्य जीवन की ओर बढ़ ही रही थी कि पिछले दिनों वह फेफड़ों के संक्रमण की चपेट में आ गई। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी सेहत में सुधार नहीं हुआ और उसने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।