पीलीभीत। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के आदेशों के अनुपालन और जनपद न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों की समस्याओं के निस्तारण हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव ने बीते दिनों जिला कारागार पीलीभीत का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल में बंद अभियुक्तों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और उनके त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। इस दौरान बीसलपुर थाने के ग्राम वख्तावर लाल निवासी बंदी सनी पुत्र सुनील का मामला सामने आया, जिसकी रिहाई 30,000 रुपये की जुर्माने की धनराशि जमा न होने के कारण अटकी हुई थी। इस संबंध में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्राप्त पत्र पर संज्ञान लेते हुए सचिव ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने स्थानीय एनजीओ ‘निःशक्त जनसेवा संस्थान’ पीलीभीत से सामंजस्य स्थापित कर बंदी सनी की आर्थिक मदद का मार्ग प्रशस्त किया। संस्थान के सहयोग से बंदी के जुर्माने की कुल 30,000 रुपये की धनराशि जमा कराई गई, जिसके बाद विधिक प्रक्रिया पूर्ण होते ही अभियुक्त सनी को जिला कारागार से रिहा कर दिया गया। प्राधिकरण की इस सक्रियता और सामाजिक संस्था के सहयोग से एक निर्धन बंदी को जेल से मुक्ति मिल सकी है। इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन के अभाव में कोई भी व्यक्ति न्याय या अपनी स्वतंत्रता से वंचित न रहे। निरीक्षण और रिहाई की इस प्रक्रिया के दौरान जेल प्रशासन और प्राधिकरण के संबंधित कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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