​पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और लंबे समय से लंबित न्यायोचित मांगों के निस्तारण हेतु ‘महर्षि बाल्मीकि सेना (अटल)’ ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. अटल बाल्मीकि के नेतृत्व में भारी संख्या में जुटे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को पीलीभीत के जिलाधिकारी के प्रभारी अधिकारी एवं उप जिलाधिकारी पवन कुमार से मुलाकात की और उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक विस्तृत 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘महर्षि बाल्मीकि सेना (अटल)’ प्रदेश के सफाई कर्मचारियों के हितों, उनके अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए सदैव दृढ़ संकल्पित रही है। इसी कड़ी में 7 जुलाई 2026 को पूरे प्रदेश के सभी जनपदों में जिलाधिकारियों के माध्यम से सरकार तक सफाई कर्मियों की आवाज पहुंचाई जा रही है, ताकि इन शोषित कर्मचारियों को न्याय मिल सके।


​मुख्यमंत्री को भेजे गए इस 9 सूत्रीय ज्ञापन में संगठन ने सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण और ठेका प्रथा के अंतर्गत हो रहे कथित भ्रष्टाचार को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में पहली और प्रमुख मांग यह की गई है कि वर्ष 2006 से प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में कार्यरत समस्त संविदा सफाई कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से स्थायी (नियमित) किया जाए। इसके साथ ही संगठन ने एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हुए मांग की है कि वर्ष 2017 से जून 2026 तक नगर निकायों में सफाई कार्य की लेबर सप्लाई करने वाली ठेका संस्थाओं की गहन जांच कराई जाए। यह पता लगाया जाए कि इन संस्थाओं द्वारा ठेका सफाई कर्मचारियों का ई.पी.एफ. पूरी ईमानदारी से जमा किया गया है या नहीं; और ई.पी.एफ. की रकम दबाने वाली दोषी फर्मों को तत्काल प्रभाव से ब्लैक लिस्ट कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा कर्मचारियों का हक उन्हें ब्याज सहित वापस दिलाया जाए।


​इसके अतिरिक्त, संगठन ने सफाई कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और रोजगार के अधिकारों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मांगें शासन के सामने रखी हैं। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि प्रदेश के समस्त नगर निकायों में विशेष शिविर लगाकर ठेका सफाई कर्मचारियों का ई.एस.आई. (ESI) तथा श्रम विभाग में अनिवार्य रूप से पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। वहीं, कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए निकायों में सफाई कर्मचारियों की दिन में दो बार बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग भी उठाई गई है। संगठन ने आरोप लगाया कि ठेका प्रथा के अंतर्गत सफाई कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन दिया जा रहा है, जबकि निकायों से ठेकेदार संस्था को पूर्ण भुगतान होता है; इस बीच में होने वाली बंदरबांट और वित्तीय घोटाले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों का जिक्र करते हुए मांग की गई कि ‘सुलभ शौचालयों’ की साफ-सफाई के लिए केयर टेकरों की नियुक्ति में प्रधानों व सचिवों द्वारा की गई अनियमितताओं की जांच हो और गैर-स्वच्छकारों के स्थान पर स्वच्छकार जाति (जैसे बाल्मीकि समाज) के लोगों को ही नियुक्त किया जाए।


​ज्ञापन में आगे उत्तर प्रदेश के भीतर सफाई कार्य से ‘ठेका प्रथा’ को पूरी तरह समाप्त कर बाल्मीकि समाज के युवाओं को सीधी भर्ती में अवसर प्रदान करने, उत्तर प्रदेश के ए.आर.टी.ओ. (ARTO) विभाग में वर्ष 1987-88 से कार्यरत अंशकालिक सफाई कर्मचारियों को परमानेन्ट (स्थायी) नियुक्ति देने तथा प्रदेश में वर्गीकरण आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने की पुरजोर वकालत की गई है। संगठन ने चेतावनी भरे लहजे में अनुरोध किया है कि इन सभी जनहित और कर्मचारी हित की मांगों पर सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक शासनादेश जारी करे। इस महत्वपूर्ण अवसर पर ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के जिला अध्यक्ष मुकुल बाल्मीकि, राम कुमार गुप्ता, गुड्डू बाल्मीकि, संजीव बाल्मीकि, बाबू भाई, मोती राम दिवाकर, गोपाल प्रजापति, भगवान दास, राम दास, राज किरण, मोहित, पंकज, हरदेश, तिलक राम, धर्मेंद्र, अभिषेक सिंह, संजू, कैलाश, शेखर, अजय भारती, लवी, मुकेश मिश्र, विनीता, आकाश, सतीश तथा प्रमोद कुमार सहित भारी संख्या में बाल्मीकि समाज के गणमान्य लोग और सफाई कर्मचारी उपस्थित रहे।

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