वाराणसी। ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में संक्रामक बीमारियों और मौसमी वायरसों के बीच वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Covid-19) ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। यहाँ के ककरमत्ता क्षेत्र में संचालित एक निजी चिकित्सालय में उपचार के लिए लाए गए पड़ोसी जिले चंदौली के एक दो वर्षीय मासूम बच्चे के भीतर कोरोना संक्रमण के सक्रिय लक्षणों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। चिकित्सालय द्वारा जारी की गई पैथोलॉजी रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और महामारी नियंत्रण विंग पूरी तरह से हाई-अलर्ट मोड पर आ गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय ने तत्काल इस मामले को संज्ञान में लेते हुए ककरमत्ता स्थित अस्पताल से बच्चे की ट्रेवल हिस्ट्री और चिकित्सा इतिहास का पूरा ब्यौरा तलब किया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, मूल रूप से चंदौली जनपद के एक ग्रामीण अंचल का रहने वाला यह दो वर्षीय बालक पिछले कुछ समय से अत्यधिक तेज बुखार, अत्यधिक सर्दी और लगातार सूखी खांसी की गंभीर समस्या से ग्रसित था। स्थानीय स्तर पर आराम न मिलने के कारण परिजनों ने उसे वाराणसी के ककरमत्ता स्थित निजी अस्पताल के पीडियाट्रिक (बाल रोग) वार्ड में दाखिल कराया था। डॉक्टरों ने जब एहतियात के तौर पर बच्चे का कोविड टेस्ट कराया, तो उसकी रिपोर्ट सकारात्मक (पॉजिटिव) आई। इसके तुरंत बाद, अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा मानकों (SOP) का कड़ाई से अनुपालन करते हुए संक्रमित बच्चे को सामान्य वार्ड से हटाकर वेंटिलेशन युक्त पृथक (आइसोलेशन) वार्ड में स्थानांतरित कर दिया। डॉक्टरों की कोर टीम ने बताया कि बच्चे को आवश्यक एंटी-वायरल दवाएं दी जा रही हैं और वर्तमान में उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता व पल्स रेट पूरी तरह से स्थिर व सामान्य है।
उल्लेखनीय है कि वाराणसी और पूर्वांचल के चिकित्सा हब में पिछले कुछ दिनों के भीतर कोविड-19 संक्रमण का यह तीसरा पुष्ट मामला सामने आया है, जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीमें अत्यधिक सक्रिय हो गई हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बच्चे के माता-पिता और उनके संपर्क में आए परिजनों की भी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संपर्क जांच) शुरू कर दी गई है ताकि संक्रमण के स्थानीय फैलाव को समय रहते पूरी तरह रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे इस मानसूनी सीजन में सर्दी-खांसी और बुखार जैसे लक्षणों को हल्के में न लें और भीड़भाड़ वाले संवेदनशील स्थानों व अस्पतालों में जाते समय मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे बुनियादी स्वास्थ्य नियमों का स्वेच्छा से पालन सुनिश्चित करें।