विधि संवाददाता,​पीलीभीत। रेलवे में बुकिंग क्लर्क के पद पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर करीब पंद्रह लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले में न्याय विभाग से बड़ी खबर है। जनपद सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने मामले की सुनवाई के बाद मुख्य आरोपी मोहम्मद मोहसिन की नियमित जमानत याचिका को कुछ कड़े प्रतिबंधों और शर्तों के साथ स्वीकार कर लिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जमानत राशि और मुचलके दाखिल करने के बाद, संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर आरोपी को जेल से रिहा कर दिया जाए।
​पैसे ऐंठे और केजीएन कॉलोनी का मकान भी करा लिया नाम
अभियोजन कथानक के अनुसार, थाना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत यह मामला बीती 7 फरवरी 2026 को तब दर्ज हुआ था, जब पीड़ित मोहम्मद इमरान ने पुलिस को तहरीर दी। इमरान ने बताया कि मोहल्ला भूरे खान निवासी मोहम्मद मोहसिन से उसके पिछले पांच-छह सालों से अच्छे संबंध थे। इसी का फायदा उठाकर मोहसिन ने इमरान को रेलवे में बुकिंग क्लर्क की सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया और इसके बदले पंद्रह लाख रुपए की मांग की। मोहसिन के कहने पर इमरान ने शुरुआत में 1,89,000 रुपए पंकज जायसवाल नाम के व्यक्ति को दे दिए। इसके बाद जब बकाया 13 लाख रुपए की मांग की गई, तो आरोपी मोहसिन ने इमरान पर दबाव बनाया कि वह अपना मकान अपने ससुर मोहम्मद नजम के नाम ट्रांसफर कर दे, ताकि नौकरी का काम पक्का किया जा सके। झांसे में आकर पीड़ित ने केजीएन कॉलोनी स्थित अपना मकान मोहम्मद नजम के नाम रजिस्ट्री कर दिया।
​न नौकरी मिली, न मकान; पुलिस ने दर्ज किया था धोखाधड़ी का केस
पैसे और मकान हाथ में आने के बाद भी आरोपियों ने मोहम्मद इमरान की नौकरी नहीं लगवाई। काफी समय बीतने के बाद जब पीड़ित ने अपने रुपए और मकान वापस मांगे, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। पीड़ित का आरोप है कि मोहम्मद नजम, मोहम्मद मोहसिन और पंकज जायसवाल ने एक सोची-समझी साजिश के तहत सरकारी नौकरी का लालच देकर उसके साथ इतनी बड़ी ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी मोहम्मद मोहसिन को जेल भेज दिया था।
​अदालत ने इन शर्तों पर दी जमानत
जेल में बंद आरोपी मोहम्मद मोहसिन की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) महेंद्र पाल गंगवार ने दलीलें पेश करते हुए जमानत का विरोध किया, वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरोपी के पक्ष में अपनी बातें रखीं। जनपद सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने और केस डायरी का बारीकी से अवलोकन करने के बाद आरोपी मोहम्मद मोहसिन की जमानत याचिका को मंजूर तो कर लिया, लेकिन उस पर कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं।
​न्यायालय के आदेश के अनुसार, आरोपी को मुकदमे के विचारण और विवेचना में पुलिस व कोर्ट का पूरा सहयोग करना होगा। आरोप तय होने और गवाहों के बयान जैसी महत्वपूर्ण तारीखों पर उसे व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा। इसके अलावा वह केस से जुड़े किसी भी गवाह को न तो प्रलोभन देगा और न ही डराएगा-धमकाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी भविष्य में अपना कोई भी स्थाई या अस्थाई पता बदलता है, तो इसकी लिखित सूचना उसे तत्काल न्यायालय को देनी होगी।

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