विधि संवाददाता, ​पीलीभीत। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में फल के दाम को लेकर हुए विवाद और जानलेवा हमले के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी डब्लू पी) अनु सक्सेना ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद साक्ष्य के अभाव में दो सगे भाइयों सहित चार आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। इसके साथ ही, न्यायालय ने मामले में झूठी गवाही देने और भ्रामक तथ्य पेश करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए शिकायतकर्ता के खिलाफ ही अलग से प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं, जिसकी सुनवाई के लिए 11 जून की तिथि नियत की गई है।
​फल के दाम को लेकर हुआ था विवाद
अभियोजन कथानक के अनुसार, थाना कोतवाली के मोहल्ला देशनगर निवासी राजू ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 18 जुलाई 2024 की शाम करीब 7:30 बजे मोहल्ला सराय खाम निवासी मुन्ने के पुत्र रिजवान और इरशाद उसके ठेले पर फल खरीदने आए थे। कुछ ही देर में फल के दाम को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी और गाली-गलौज होने लगी। राजू का आरोप था कि जब उसने गाली देने से मना किया, तो दोनों भाइयों ने जान से मारने की नीयत से उस पर हमला कर दिया।
​फायरिंग और लाठी-डंडों से मारपीट का था आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक, शोर-शराबा सुनकर जब आसपास के लोग इकट्ठा होने लगे, तो आरोपियों के साथी उस्मान व नईम अपने 4-5 अज्ञात साथियों के साथ लाठी-डंडे और तमंचा लेकर मौके पर पहुंच गए। आरोप था कि इन लोगों ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर भी किया, जो मिस हो गया। इसके बाद सभी ने मिलकर लाठी-डंडों से मारपीट की, जिसमें राजू और उसके पुत्र को चोटें आईं। पीड़ित ने बताया था कि आरोपी तमंचा लहराते हुए और जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए थे। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर विवेचना के बाद रिजवान, इरशाद, उस्मान और नईम के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
​आरोप सिद्ध न होने पर कोर्ट ने किया बरी, वादी पर गिरेगी गाज
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह पेश किए गए, वहीं आरोपियों ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए आरोपों को निराधार बताया। अपर सत्र न्यायाधीश अनु सक्सेना ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया और पाया कि आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। इसके आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। वहीं, अदालत में झूठे साक्ष्य और गवाही देने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने शिकायतकर्ता राजू के खिलाफ ही कानूनी कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं, जिससे अब झूठी शिकायत करने वालों को कड़ा संदेश मिला है।

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