रुद्रपुर। सिंचाई के बिजली बिल माफ करने, प्रत्येक किसान को 300 यूनिट तक मुफ्त विद्युत उपलब्ध कराने और लंबे समय से काबिज भूमि पर भूमिधरी अधिकार देने समेत विभिन्न मांगों को लेकर जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों किसानों ने शुक्रवार को रुद्रपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। किसान संगठनों के आह्वान पर किसानों ने कलेक्ट्रेट कूच किया। रास्ते में पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोक दिया गया, जिससे किसानों का आक्रोश बढ़ गया। बाद में किसान बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट तक पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए।
कलेक्ट्रेट एवं विकास भवन जाने वाले मुख्य मार्ग पर भारी पुलिस फोर्स के साथ बैरिकेडिंग की गई थी। किसानों को रास्ते में रोके जाने के बाद वे नैनीताल हाईवे के किनारे धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि हाईवे के किनारे धरना देने से यातायात प्रभावित हो रहा है, इसलिए उन्हें कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट तक जाने दिया जाए, जहां वे शांतिपूर्वक अपना धरना जारी रखेंगे।
मौके पर पहुंचे एसडीएम महेंद्र सिंह बिष्ट ने किसान नेताओं से काफी देर तक वार्ता की। किसान नेताओं ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से धरना, प्रदर्शन और सभा करने आए हैं और प्रशासन उन्हें बेवजह ऐसी स्थिति में न धकेले जिससे टकराव पैदा हो।

बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट गेट तक पहुंचे किसान
किसानों को कलेक्ट्रेट परिसर में जाने की अनुमति नहीं मिलने के बाद उनका आक्रोश बढ़ता गया। काफी देर तक हाईवे किनारे धरना देने के बाद किसान एकजुट होकर लकड़ी की बैरिकेडिंग तोड़ते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट तक पहुंच गए। मुख्य गेट पर ताला लगा था और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे।
इस दौरान कुछ युवा किसानों ने गेट पर चढ़कर अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन बुजुर्ग किसानों ने उन्हें नीचे उतार दिया। उन्होंने कहा कि किसान गांधीवादी तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरना देने आए हैं और किसी तरह की जोर-जबरदस्ती नहीं की जाएगी। इसके बाद किसानों ने मुख्य गेट के बाहर दरियां बिछाकर धरना शुरू कर दिया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे।

300 यूनिट मुफ्त बिजली और सिंचाई बिल माफी प्रमुख मांग
किसानों की प्रमुख मांगों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली के बिल माफ करना और प्रत्येक किसान को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा लंबे समय से काबिज भूमि वर्ग ‘क’ और ‘ख’ पर भूमिधरी अधिकार देने की मांग भी उठाई गई।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों के लिए खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में सिंचाई की बिजली पर राहत और किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना जरूरी है।
चुनावी वादे पूरे करने की मांग
किसान नेताओं ने भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का हवाला देते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त विद्युत उपलब्ध कराने और बिजली के बिल माफ करने का वादा किया गया था।
किसान नेताओं के अनुसार उत्तर प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में इन घोषणाओं पर अमल किया जा रहा है, लेकिन उत्तराखंड के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से चुनावी वादे को पूरा करते हुए सिंचाई बिजली के बिल माफ करने और मुफ्त बिजली की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
किसान यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि यह तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन है और संगठन के अग्रिम आदेश तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार और प्रशासन से किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। प्रदर्शन में विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी और जिलेभर से आए सैकड़ों किसान शामिल रहे।

कलेक्ट्रेट के तीनों गेटों पर भारी पुलिस फोर्स तैनात
किसानों के कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही प्रशासन और पुलिस विभाग सक्रिय हो गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विभिन्न थानों से कोतवालों, थानाध्यक्षों और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को सुबह से ही कलेक्ट्रेट के तीनों गेटों पर तैनात किया गया था।
कलेक्ट्रेट के आसपास बैरिकेडिंग के साथ जेसीबी भी तैनात की गई थी। पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहे और बैरिकेडिंग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। समाचार लिखे जाने तक कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के बाहर किसानों का धरना शांतिपूर्ण ढंग से जारी था और प्रशासन की ओर से किसान प्रतिनिधियों से वार्ता की तैयारी की जा रही थी।
किसानों ने पुलिस-प्रशासन कर्मियों को भी कराया भोजन
धरना स्थल पर किसानों ने सभा करने के साथ दोपहर और रात का भोजन भी वहीं किया। किसान लाइनों में बैठकर लंगर का भोजन करते नजर आए। इस दौरान किसान नेताओं ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस और प्रशासन के कर्मचारियों को भी भोजन के लिए आमंत्रित किया।
किसान नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन मांगों को लेकर है और वे इसे शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखना चाहते हैं।
