पीलीभीत। पीलीभीत के माधोटांडा से निकलने वाली और उत्तर प्रदेश के 14 जिलों की जीवनरेखा कही जाने वाली गोमती नदी के संरक्षण और संवर्धन के लिए ‘यूथ इन एक्शन’ संस्था द्वारा एक वृहद ‘गोमती जीवन यात्रा’ का आयोजन किया जा रहा है। यह 1,500 किलोमीटर लंबी यात्रा 15 फरवरी को पीलीभीत के माधोटांडा स्थित उद्गम स्थल से शुरू होकर 13 मार्च को गाजीपुर के कैथी मार्कंडेय महादेव स्थित गोमती-गंगा संगम पर संपन्न होगी। इस यात्रा का मुख्य ध्येय सिसकियां भर रही गोमती के प्रति जन-जागरण पैदा करना और नदी संरक्षण को एक सशक्त जन आंदोलन बनाना है।
यात्रा की भव्यता और इसकी आध्यात्मिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए 14 फरवरी को गोमती उद्गम स्थल पर रामचरितमानस का पाठ प्रारंभ किया जाएगा, जिसका समापन 15 फरवरी को प्रसाद वितरण के साथ होगा। इसके पश्चात यात्रा विधिवत रूप से आगे बढ़ेगी। यात्रा के शुभारंभ के साथ ही रम्पुरा फकीरे गांव में ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं के साथ संवाद स्थापित कर विशेष आरती का आयोजन किया जाएगा। यूथ इन एक्शन के राष्ट्रीय संयोजक शतरुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह यात्रा केवल नदी की समस्याओं को गिनाने के लिए नहीं, बल्कि समाधान की दिशा में एक सामूहिक पहल है।
1500 किलोमीटर के इस लंबे सफर में यात्रा पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, नैमिषारण्य, प्रतापगढ़, जौनपुर, वाराणसी और गाजीपुर जैसे प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान प्रत्येक पड़ाव पर तीन विशेष कार्यक्रम—नदी पूजन, तटों पर पौधरोपण और ‘नदी विमर्श गोष्ठियां’ आयोजित की जाएंगी। इसके माध्यम से विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्राम चौपालों में नगर संवाद स्थापित किया जाएगा। बुजुर्गों के अनुभव साझा करते हुए यह बताया जाएगा कि 40-50 साल पहले गोमती कितनी स्वच्छ और अविरल थी और वर्तमान में इसकी स्थिति के लिए कौन से कारक जिम्मेदार हैं।
गोमती जीवन के अंशुमन तिवारी ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को नदी के पर्यावरणीय महत्व और उसके आध्यात्मिक महात्म्य से जोड़ना है। गोमती के किनारे बसे सभी 14 जिलों में लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि यदि आज हम अपनी नदियों के प्रति सचेत नहीं हुए, तो भविष्य का संकट और गहरा हो जाएगा। यह यात्रा पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं के साझा प्रयास से गोमती के अस्तित्व को नई ऊर्जा देने का काम करेगी।