बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रेवती थाने में एक दलित युवक की कथित तौर पर पुलिस कस्टडी में थर्ड डिग्री टॉर्चर के कारण हुई मौत के बाद हड़कंप मच गया है। इस गंभीर और संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस प्रशासन ने 6 आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। मृतक की पहचान के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है, जिसके मद्देनजर उच्च अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

इस पूरे मामले में कार्रवाई मृतक युवक के बेटे विशाल की लिखित तहरीर के आधार पर की गई है। विशाल ने पुलिस को दी गई शिकायत में रेवती थाने के पुलिसकर्मियों और स्थानीय रसूखदारों पर अपने पिता को बेरहमी से पीटने और प्रताड़ित करने का सीधा आरोप लगाया है। बेटे की इसी तहरीर को आधार बनाते हुए रेवती थाने में ही संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है, ताकि घटना की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

दर्ज की गई एफआईआर में मुख्य रूप से रेवती थाने में तैनात दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) सचिन सरोज और सिपाही (कांस्टेबल) अंकित सिंह को नामजद किया गया है। इसके अलावा स्थानीय ग्राम प्रधान लालू और एक अन्य आरोपी मनीष यादव सहित कुल छह लोगों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया है। आरोप है कि इन सभी लोगों की मिलीभगत और शह पर ही थाने के भीतर युवक को गंभीर शारीरिक यातनाएं दी गईं, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और अंततः उसकी मौत हो गई।

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग के आला अधिकारी खुद रेवती थाने और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पुलिस विभाग का ही क्यों न हो। फिलहाल मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया गया है।

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