पीलीभीत। जनपद में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना 2.0 के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के नगर महामंत्री अमरीश शर्मा ने डूडा (नगरीय विकास अभिकरण) के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, बंदरबांट और सरकारी धन के दुरुपयोग का संगीन आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। पत्र में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अपात्रों को लाभ पहुँचाने और पात्रों की अनदेखी करने का दावा किया गया है।
वार्डों के आवंटन में भेदभाव और मनमानी
भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि डूडा के अधिकारियों ने आवासों के आवंटन में भारी भेदभाव किया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पीलीभीत नगर के 27 वार्डों में से वार्ड संख्या 6 में अकेले 58 आवास आवंटित किए गए, जबकि वार्ड संख्या 15 में एक भी लाभार्थी को शामिल नहीं किया गया। इसी तरह वार्ड संख्या 16 में 21 आवास स्वीकृत हुए हैं। आरोप है कि कई ऐसे वार्डों की पूरी तरह अनदेखी की गई है जहाँ गरीब और जरूरतमंदों की संख्या अधिक है।

अपात्रों और सरकारी कर्मियों को लाभ पहुँचाने का आरोप
शिकायती पत्र में यह सनसनीखेज खुलासा किया गया है कि डूडा द्वारा उन लोगों को भी आवास स्वीकृत किए गए हैं जो पहले से संपन्न हैं या जिनके पास एक से अधिक पक्के मकान हैं। अमरीश शर्मा का दावा है कि कई ऐसे लाभार्थियों के नाम सूची में हैं जो स्वयं या जिनके परिवार के सदस्य केंद्र व प्रदेश सरकार में सरकारी नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने इसे सरकारी धन का खुला घोटाला करार दिया है।
विधवा, विकलांग और जर्जर मकान वालों की अनदेखी
भाजपा नेता ने डूडा की कार्यप्रणाली को सरकार की मंशा के विपरीत बताते हुए कहा कि सूची में पात्र विकलांगों, विधवाओं और बेसहारा परिवारों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर में सैकड़ों ऐसे आवेदक हैं जिनके मकान कच्चे या जर्जर हालत में हैं और उनका सर्वे भी हो चुका है, लेकिन उन्हें सूची से बाहर रखा गया है। साथ ही, उन्होंने एक विशेष समुदाय को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए इसे अधिकारियों की भेदभावपूर्ण नीति बताया।
दोषियों पर कार्रवाई और रिकवरी की मांग
अमरीश शर्मा ने जिलाधिकारी से मांग की है कि डूडा के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की आय, बैंक खातों और चल-अचल संपत्ति की जांच कराई जाए। उन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच कराकर अपात्रों को दी गई धनराशि की रिकवरी करने और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को भी भेजी गई है।