​पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन शहीद कुंदन लाल सभागार में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के तहत अनुग्रह राशि दावा प्रक्रियाओं और बीमा संबंधी जागरूकता को लेकर दो दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फील्ड डायरेक्टर पी.पी. सिंह ने दीप प्रज्वलित कर सत्र का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष वर्तमान में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बाघ मित्रों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे वनकर्मियों के पूरक के रूप में कार्य कर रहे हैं और उनके समर्पण से ही संघर्ष प्रबंधन को नई दिशा मिली है।
​प्रशिक्षण के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि विभाग की प्राथमिकता पीड़ित परिवारों को समयबद्ध तरीके से अनुग्रह राशि उपलब्ध कराना होनी चाहिए। वहीं, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी, भारत कुमार डी.के. ने वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए बताया कि फसलों की कटाई के बाद खेत खाली होने से वन्यजीवों के पास छुपने के स्थान कम हो गए हैं। इस कारण कुत्तों द्वारा शाकाहारी वन्यजीवों को घायल करने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसके लिए उन्होंने सभी को अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए।


​प्रशिक्षण के प्रथम दिन पीलीभीत, माला, महोफ और बीसलपुर रेंज के अधिकारियों, कर्मचारियों और बाघ मित्रों को मुआवजे की जटिल प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से समझाया गया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने वन्यजीवों द्वारा जनहानि, पशु हानि, संपत्ति और फसल के नुकसान से संबंधित मुआवजा प्राप्त करने के सरल और प्रभावी तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण ही पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत पहुंचा सकता है।
​कार्यक्रम में फ्रंटलाइन स्टाफ की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया की ओर से जानकारी दी गई कि ड्यूटी के दौरान मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में फ्रंटलाइन कर्मचारियों या उनके परिजनों को निर्धारित मानदंडों के तहत 3 लाख रुपये की अनुग्रह वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर उप प्रभागीय वनाधिकारी रूद्र प्रताप सिंह, रेंजर विनीत कुमार, रोविन कुमार, शेर सिंह सहित भारी संख्या में वन दरोगा, वनरक्षक और बाघ मित्र उपस्थित रहे।

(आधुनिक दुनिया को सभी स्थानों पर संवाददाताओं की आवश्यकता है। इच्छुक संपर्क करें- 8923815100 व्हाट्अप पर अपना नाम, स्थान, यदि कोई अनुभव है तो उसकी जानकारी और कहां से संवाददाता बनना चाहते हैं उस स्थान का नाम लिखें संपर्क करें। यदि आप पत्रकारिता सीखने के इच्छुक हैं, तो भी संपर्क कर सकते हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Site designed and maintained by Lalit Rastogi