​पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में एक भावुक और प्रेरणादायक कदम उठाते हुए ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस विशेष अभियान के तहत अब जिले की कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राएं और दिव्यांग स्कूली बच्चे प्रकृति की खूबसूरती और वन्यजीवों के रोमांच का नि:शुल्क आनंद ले सकेंगे। उत्तर प्रदेश वन विभाग के मुखिया सुनील चौधरी और उनकी धर्मपत्नी सुनैना चौधरी ने सफारी गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर इस मानवीय पहल की विधिवत शुरुआत की।

इस कार्यक्रम की सबसे अनूठी विशेषता इसका समय चयन है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में प्रत्येक बुधवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है, जिस दौरान सामान्य पर्यटन गतिविधियां बंद रहती हैं। प्रशासन ने इसी दिन का सदुपयोग करने का निर्णय लिया है ताकि बिना किसी शोर-शराबे और पर्यटकों की भीड़ के, ये बच्चे शांतिपूर्ण वातावरण में प्रकृति को करीब से निहार सकें। संसाधनों के अभाव में जो बच्चे अब तक जंगल की सैर से वंचित थे, उन्हें अब विभाग स्वयं अपनी सुरक्षित गाड़ियों में बिठाकर टाइगर रिजर्व के दीदार कराएगा।


​सफारी पर रवाना होने से पूर्व बच्चों को जंगल के भीतर बरती जाने वाली सावधानियों और पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया गया। महोफ के रेंजर सहेंद्र यादव, विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार और वन्य जीव एवं जैव विविधता संरक्षण समिति के महासचिव डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने बच्चों को जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन की बारीकियों से अवगत कराया। इस अवसर पर पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर पीपी सिंह, डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह, बरेली की डीएफओ दीक्षा भंडारी सहित रामपुर, शाहजहांपुर व बदायूं के प्रभागीय वनाधिकारी भी मौजूद रहे।
​व्यावहारिक ज्ञान से प्रबल होगी संरक्षण की भावना
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि ‘दिव्य दर्शन’ का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से परे व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। जब बच्चे अपनी आंखों से बाघ, हिरण और दुर्लभ पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखेंगे, तो उनके मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति को बचाने का संकल्प और अधिक दृढ़ होगा। नई पीढ़ी को जागरूक करने की दिशा में वन विभाग का यह कदम आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा।

देश का पहला टाइगर रिजर्व बना पीलीभीत: दिव्यांगों के लिए खुलीं प्रकृति की राहें
​पीलीभीत। ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम के साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने देश के संरक्षण इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है। प्रदेश के प्रधान वन संरक्षक एवं वन सुरक्षा बल प्रमुख सुनील चौधरी ने इस पहल की सराहना करते हुए घोषणा की कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व देश का ऐसा पहला टाइगर रिजर्व बन गया है, जिसने दिव्यांगों को जंगल सफारी के माध्यम से प्रकृति से जोड़ने की अनूठी प्रक्रिया आरंभ की है।
​”समाज के लिए सकारात्मक संदेश”
प्रधान वन संरक्षक सुनील चौधरी ने कहा, “अभी तक देश के किसी भी टाइगर रिजर्व में इस तरह की विशिष्ट पहल नहीं की गई है। पीटीआर प्रशासन का यह कदम न केवल समाज में एक सकारात्मक और समावेशी संदेश देगा, बल्कि इससे वन्यजीव संरक्षण की गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी।”
अधिकारियों की थपथपाई पीठ:
पीसीसीएफ ने इस संवेदनशील और नवाचारी सोच के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर पीपी सिंह और डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह के प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने निर्देश दिए कि इस कार्यक्रम को निरंतर जारी रखा जाए ताकि समाज का हर वर्ग वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास के प्रति जागरूक और संवेदनशील बन सके।

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