पीलीभीत। सूचना विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद में पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और हरित आवरण को तेजी से बढ़ाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में जिला पर्यावरणीय, जिला वृक्षारोपण एवं जिला गंगा समिति की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक कलेक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी भरत कुमार डी.के. ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि जनपद को पूर्व में निर्धारित 33 लाख पौधारोपण लक्ष्य के स्थान पर अब शासन से 40 लाख पौधारोपण का नया संशोधित लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों को आवंटित किए गए पौधों के लक्ष्यों की जानकारी दी और पिछले वर्षों में किए गए वृक्षारोपण की विभागवार सफलता व पौधों की जीवितता दर (सर्वाइवल रेट) का पूरा विवरण प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय नर्सरियों में पौधों की उपलब्धता तथा आगामी वृहद वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों की रूपरेखा भी सामने रखी।
बैठक में नदियों को स्वच्छ रखने और उनमें बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम को लेकर बेहद कड़े लहजे में समीक्षा की गई। इस दौरान विभिन्न नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि नदियों में शहर का कूड़ा-कचरा और अपशिष्ट जाने से रोकने के लिए प्रमुख नालों पर लोहे के जाल (मेष) लगाए गए हैं, जिनकी नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। इस पर जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने दो टूक निर्देश दिए कि पवित्र नदियों में कूड़ा डालना किसी भी परिस्थिति में क्षम्य नहीं होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी नालों की दैनिक आधार पर साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और नदी प्रदूषण को रोकने के लिए धरातल पर प्रभावी विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाए। उन्होंने साफ कहा कि जल स्रोतों की स्वच्छता एवं उनका संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या पर लगाम लगाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) को विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर धुआं उड़ाने वाले और मानकों के विपरीत चल रहे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध तत्काल एक विशेष अभियान चलाकर प्रभावी व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, बैठक में जिले के भीतर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) और उसके निस्तारण की वर्तमान स्थिति की भी बारीकी से समीक्षा की गई। उपस्थित जिम्मेदार अधिकारियों ने शहर से कूड़ा संग्रहण (कलेक्शन), उसके पृथक्करण (सेग्रिगेशन), प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण की व्यवस्थाओं के संबंध में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिलाधिकारी ने इन कार्यों की गति और प्रभावशीलता को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्र, डीएफओ सामाजिक वानिकी भरत कुमार डीके , मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, डीसी मनरेगा, एआरटीओ, नामित सदस्य शिवम कश्यप सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
पीलीभीत। सूचना विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद में पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और हरित आवरण को तेजी से बढ़ाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में जिला पर्यावरणीय, जिला वृक्षारोपण एवं जिला गंगा समिति की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक कलेक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी भरत कुमार डी.के. ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि जनपद को पूर्व में निर्धारित 33 लाख पौधारोपण लक्ष्य के स्थान पर अब शासन से 40 लाख पौधारोपण का नया संशोधित लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों को आवंटित किए गए पौधों के लक्ष्यों की जानकारी दी और पिछले वर्षों में किए गए वृक्षारोपण की विभागवार सफलता व पौधों की जीवितता दर (सर्वाइवल रेट) का पूरा विवरण प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय नर्सरियों में पौधों की उपलब्धता तथा आगामी वृहद वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों की रूपरेखा भी सामने रखी।
बैठक में नदियों को स्वच्छ रखने और उनमें बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम को लेकर बेहद कड़े लहजे में समीक्षा की गई। इस दौरान विभिन्न नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि नदियों में शहर का कूड़ा-कचरा और अपशिष्ट जाने से रोकने के लिए प्रमुख नालों पर लोहे के जाल (मेष) लगाए गए हैं, जिनकी नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। इस पर जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने दो टूक निर्देश दिए कि पवित्र नदियों में कूड़ा डालना किसी भी परिस्थिति में क्षम्य नहीं होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी नालों की दैनिक आधार पर साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और नदी प्रदूषण को रोकने के लिए धरातल पर प्रभावी विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाए। उन्होंने साफ कहा कि जल स्रोतों की स्वच्छता एवं उनका संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या पर लगाम लगाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) को विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर धुआं उड़ाने वाले और मानकों के विपरीत चल रहे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध तत्काल एक विशेष अभियान चलाकर प्रभावी व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, बैठक में जिले के भीतर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) और उसके निस्तारण की वर्तमान स्थिति की भी बारीकी से समीक्षा की गई। उपस्थित जिम्मेदार अधिकारियों ने शहर से कूड़ा संग्रहण (कलेक्शन), उसके पृथक्करण (सेग्रिगेशन), प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण की व्यवस्थाओं के संबंध में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिलाधिकारी ने इन कार्यों की गति और प्रभावशीलता को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्र, डीएफओ सामाजिक वानिकी भरत कुमार डीके , मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, डीसी मनरेगा, एआरटीओ, नामित सदस्य शिवम कश्यप सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।