पीलीभीत। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में लगातार बढ़ रही अतिक्रमण की समस्या के प्रभावी और त्वरित निराकरण के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता बरेली मंडलायुक्त द्वारा की गई। बैठक में सीमा की सुरक्षा और वनों के संरक्षण से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 49वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के कमांडेंट शेर सिंह चौधरी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह, वन एवं वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भरत कुमार, उपप्रभागीय वनाधिकारी रमेश चौहान और पीलीभीत सर्वे विभाग के अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
​बैठक के दौरान भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में अतिक्रमण की वर्तमान स्थिति की बिंदुवार और विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नो-मैन्स लैंड (दशगजा क्षेत्र) में स्थित सीमा स्तंभ संख्या 784 से 785 तक की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एसएसबी वाहिनी द्वारा जिला प्रशासन और नेपाल के सशस्त्र प्रहरी बल (एपीएफ) के साथ निरंतर पत्राचार किया जा रहा है। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भारतीय सीमा के भीतर शून्य से 15 किलोमीटर तक के संवेदनशील क्षेत्र को हर हाल में अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और इसके लिए अब तक की गई कार्यवाहियों की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
​इस समीक्षा बैठक में एक बड़ा खुलासा करते हुए अधिकारियों ने अवगत कराया कि पीलीभीत के बराही रेंज में लगभग 350 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण है, जो कि पर्यावरण और सुरक्षा दोनों लिहाज से बेहद चिंताजनक है। इस विशाल भूभाग को मुक्त कराने के लिए अब राजस्व विभाग की सहभागिता से एक बड़े स्तर पर अतिक्रमण विरोधी अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। बैठक के समापन पर बरेली मंडलायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए कि वे आपस में मजबूत समन्वय स्थापित करें। उन्होंने संयुक्त अभियान चलाने और आवश्यक कागजी व कानूनी औपचारिकताएं जल्द पूरी करते हुए अतिक्रमण के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था और सुरक्षा चाक-चौबंद बनी रहे।

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