रामनगर (नैनीताल): कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के मुहाने पर स्थित कोसी नदी और कोसी बैराज इन दिनों विदेशी प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुंजायमान है। एशियन वाटरबर्ड सेंसस (AWC) 2026 के ताज़ा आंकड़ों ने वन्यजीव प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है। साइबेरिया और मध्य एशिया की हाड़ कंपा देने वाली ठंड से बचकर हजारों किलोमीटर का सफर तय कर ‘सुर्खाब’ (Ruddy Shelduck) बड़ी संख्या में रामनगर पहुँच रहे हैं।

आंकड़ों में सुधार: 422 से बढ़कर 486 हुई संख्या

18 जनवरी 2026 को आयोजित 40वीं एशियन वाटरबर्ड जनगणना और 60वीं इंटरनेशनल वाटरबर्ड जनगणना के प्रारंभिक परिणामों के अनुसार, इस वर्ष सुर्खाब पक्षियों की संख्या में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2025 में जहाँ इनकी संख्या 422 थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर 486 हो गई है। नारंगी-भूरे रंग के इन खूबसूरत पक्षियों की बढ़ती तादाद क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का संकेत दे रही है।

ग्रेट कॉर्मोरेंट की संख्या भी बढ़ी, लेकिन कुछ प्रजातियों में कमी

सर्वेक्षण में पाया गया कि ‘ग्रेट कॉर्मोरेंट’ की संख्या भी 36 से बढ़कर 40 हो गई है। हालांकि, कुछ अन्य प्रजातियों की उपस्थिति में गिरावट देखी गई है:

ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट: 15 से घटकर 10

लिटिल कॉर्मोरेंट: 53 से घटकर 25

लिटिल ईग्रेट: 15 से घटकर 14

कॉमन सैंडपाइपर व ग्रीनशैंक: संख्या में मामूली कमी

पर्यटन और पर्यावरण के लिए शुभ संकेत

वन विभाग, विभिन्न पक्षी प्रेमी संगठनों और स्वयंसेवकों की मदद से किए गए इस सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि कोसी बैराज प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित ‘स्टॉपओवर’ बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ जल और संरक्षण के प्रयासों के कारण सुर्खाब यहाँ आकर्षित हो रहे हैं। इससे कॉर्बेट क्षेत्र के शीतकालीन पर्यटन को भी नई संजीवनी मिली है, क्योंकि देश-विदेश से पर्यटक इन पक्षियों को देखने पहुँच रहे हैं।

चुनौतियाँ अभी भी बरकरार

संख्या में वृद्धि के बावजूद पर्यावरणविदों ने बढ़ते प्रदूषण, मानवीय हस्तक्षेप और अतिक्रमण पर चिंता जताई है। वन विभाग के अनुसार, इन ‘विदेशी मेहमानों’ की सुरक्षा और जैव विविधता को बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।

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