आज के आधुनिक युग में जहां पारिवारिक रिश्तों में दूरियां देखने को मिलती हैं, वहीं दिल्ली की रहने वाली मशहूर हरियाणवी पार्श्व गायिका काजल चौधरी ने श्रद्धा और समर्पण की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काजल चौधरी उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ स्थल हरिद्वार की हर की पौड़ी से अपनी 90 वर्ष की बुजुर्ग सासु मां को कांवड़ में बैठाकर दिल्ली के लिए रवाना हुई हैं। इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखकर हरिद्वार पहुंचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालु और स्थानीय लोग दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हैं। काजल चौधरी पूरी आस्था और अपार श्रद्धा के साथ हरिद्वार से अपने गंतव्य दिल्ली तक का करीब 250 किलोमीटर लंबा सफर पैदल तय कर रही हैं।
काजल चौधरी की इस विशेष कांवड़ की बनावट बेहद अनूठी है, जिसमें उन्होंने संतुलन और पवित्रता का पूरा ध्यान रखा है। इस भारी-भरकम कांवड़ के एक पलड़े में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए पवित्र गंगाजल रखा गया है, तो वहीं दूसरे पलड़े में उनकी पूजनीय सासु मां विराजमान हैं। काजल इस कांवड़ को अपने कांधे पर उठाकर लगातार पैदल आगे बढ़ रही हैं। रास्ते में जो भी इस नजारे को देख रहा है, वह काजल के इस सेवा भाव की तुलना त्रेतायुग के श्रवण कुमार से कर रहा है, जिन्होंने अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी।
पारिवारिक सूत्रों और उनके पिछले इतिहास के मुताबिक, काजल चौधरी के मन में अपनी सास के प्रति यह आदर और सेवा का भाव कोई नया नहीं है। इससे पहले भी वह धार्मिक नगरी मथुरा में एक ऐसा ही बेहद कठिन कारनामा कर चुकी हैं, जहां उन्होंने अपनी इसी बुजुर्ग सास को अपने सिर पर बैठाकर ब्रज की प्रसिद्ध चौरासी कोस की परिक्रमा पूरी की थी। करीब 350 किलोमीटर लंबी उस ब्रज परिक्रमा को भी काजल ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी सास की सेवा करते हुए पूरा किया था, जिसकी उस समय भी काफी सराहना हुई थी।
काजल चौधरी की इस 250 किलोमीटर लंबी हरिद्वार-दिल्ली कांवड़ यात्रा ने इस बार के कांवड़ मेले में हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। काजल का कहना है कि उनकी सासु मां ही उनके लिए साक्षात माता-पिता और भगवान के समान हैं, इसलिए उनकी इच्छा पूरी करना और उनकी सेवा करना ही उनकी सबसे बड़ी शिव भक्ति है। इस यात्रा के दौरान रास्ते में जगह-जगह लोग इस अनोखी कांवड़ के दर्शन करने और काजल चौधरी के इस सेवा भाव की सराहना करने के लिए उमड़ रहे हैं।