रुद्रपुर। सिडकुल पंतनगर के सेक्टर-7 स्थित एक फैक्ट्री में रविवार रात कथित रूप से बाल श्रम कराए जाने के मामले में 17 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू किया गया। इस कार्रवाई के बाद जिले में बाल श्रम को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बच्चों को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में सौंप दिया गया है, जबकि संबंधित विभागों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, सेक्टर-7 स्थित दुर्गा फाइबर फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने की सूचना मिलने पर बाल कल्याण समिति की पूर्व अध्यक्ष एवं समाजसेवी डाॅ0 रजनीश बत्रा अपने सहयोगियों के साथ फैक्ट्री पहुंचीं। वहां कई बच्चों को मशीनों पर थर्माकोल प्लेट बनाते हुए पाया गया।

बताया जाता है कि टीम के फैक्ट्री परिसर में पहुंचते ही वहां मौजूद बच्चों और ठेकेदार में हड़कंप मच गया। आरोप है कि कुछ बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया गया था। कमरे से आवाजें आने पर उसे खुलवाया गया, जिसके बाद कई बच्चे बाहर निकलकर भागने लगे। टीम ने मौके से 17 बच्चों को अपने संरक्षण में लिया, जबकि कुछ बच्चे परिसर से निकलने में सफल रहे।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार रेस्क्यू किए गए बच्चों की आयु लगभग 12 से 14 वर्ष के बीच बताई जा रही है। दावा किया गया है कि ये बच्चे काफी समय से फैक्ट्री में कार्य कर रहे थे। मामले की सूचना प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति को दी गई।

डाॅ. रजनीश बत्रा ने बताया कि कुछ अधिकारियों से तत्काल संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में सौंपा गया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री का स्वामी पश्चिम बंगाल के कोलकाता में रहता है और वर्तमान में विदेश यात्रा पर बताया जा रहा है। फिलहाल फैक्ट्री का संचालन एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

श्रम विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

घटना के बाद जिले में बाल श्रम की रोकथाम को लेकर श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजारों और छोटे प्रतिष्ठानों में तो समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों की इकाइयों में निरीक्षण अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं।

हालांकि बाल श्रम से संबंधित आरोपों और विभागीय उदासीनता के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। श्रम विभाग या अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि बच्चों एवं उनके परिजनों से आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित फैक्ट्री और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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