सितारगंज। साइबर ठगी की शिकायत से जुड़े एक बैंक खाते की जांच के दौरान पुलिस ने खाताधारक के भाई समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार संबंधित बैंक खाता साइबर फ्रॉड शिकायत में प्रथम लेयर के लाभार्थी खाते के रूप में सामने आया है। मामले में पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
एसआई जगत सिंह शाही के अनुसार साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तैनात एसआई शंकर सिंह रावत और एएसआई सत्येंद्र गंगोला को बैंक ऑफ बड़ौदा की सितारगंज शाखा का एक खाता एनसीआरपी/प्रतिबिंब पोर्टल पर साइबर हॉटस्पॉट/साइबर अलर्ट के रूप में चिह्नित मिला था।
पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक इस खाते में साइबर ठगी से संबंधित 78 हजार रुपये की रकम पहुंची थी। इसके बाद खाते से अलग-अलग एटीएम ट्रांजेक्शन के माध्यम से रकम निकाले जाने की जानकारी सामने आई।
जांच में बैंक खाता वार्ड नंबर आठ निवासी कंचन रस्तोगी के नाम पर दर्ज पाया गया। पुलिस के अनुसार 14 सितंबर को एटीएम कार्ड के जरिए पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 50 हजार रुपये तथा 15 सितंबर को दो ट्रांजेक्शन में 17,100 रुपये निकाले गए। खाते से अन्य लेनदेन की भी जानकारी पुलिस जांच में सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान खाताधारक कंचन रस्तोगी घर पर नहीं मिलीं। उनके पिता महेश रस्तोगी ने पुलिस को बताया कि उक्त बैंक खाते का संचालन उनका बेटा दक्ष रस्तोगी करता है।
इसके बाद पुलिस टीम ने संबंधित एटीएम की सीसीटीवी फुटेज की जांच की। पुलिस के अनुसार फुटेज में अलग-अलग समय पर तीन व्यक्ति एटीएम से रकम निकालते हुए दिखाई दिए। उपलब्ध दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और साइबर पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने दक्ष रस्तोगी समेत चार व्यक्तियों की भूमिका को प्रथम दृष्टया जांच के दायरे में लिया है।
पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। मामले की विवेचना जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
महत्वपूर्ण: पुलिस जांच पूरी होने और न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक किसी भी व्यक्ति को साइबर ठगी का दोषी नहीं माना जा सकता। खबर में बताए गए आरोप और तथ्य पुलिस की प्रारंभिक जांच/प्राथमिकी पर आधारित हैं।