पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पीलीभीत आगमन से ठीक पहले जिले में भारी राजनीतिक गरमाहट और प्रशासनिक सख्ती देखने को मिल रही है। सुरक्षा व्यवस्था और एहतियात का हवाला देते हुए पुलिस व प्रशासन ने रविवार रात से ही विपक्षी दलों के बड़े चेहरों और किसान-मजदूर नेताओं के खिलाफ बड़ा धरपकड़ अभियान शुरू कर दिया। इस क्रम में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह ‘जग्गा’, कांग्रेस के प्रांतीय नेता कुमुद गंगवार और भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष सौरभ भारतीय समेत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को उनके आवासों पर हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर दिया गया है। विपक्ष ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है।
तड़के 4 बजे सपा जिलाध्यक्ष के घर पहुंची पुलिस, ‘जग्गा’ ने सरकार पर लगाया आवाज दबाने का आरोप
सोमवार की सुबह समाजवादी पार्टी के खेमे के लिए बड़ी कार्रवाई लेकर आई। पीलीभीत में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों के मद्देनजर, सुबह लगभग 4 बजे भारी पुलिस बल समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह ‘जग्गा’ के आवास पर पहुंच गया और उन्हें नजरबंद कर दिया। इस कार्रवाई पर आक्रोश व्यक्त करते हुए सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार प्रशासनिक तंत्र का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य समाजवादी पार्टी की मजबूत आवाज को दबाना और जनता के ज्वलंत मुद्दों को मुख्यमंत्री के समक्ष उठने से रोकना है। जगदेव सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष का काम जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना है, लेकिन सरकार विपक्ष को घरों में कैद कर लोकतंत्र की मूल भावना की हत्या कर रही है।
किसानों, बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प
नजरबंदी के दौरान सपा जिलाध्यक्ष ने प्रदेश और स्थानीय स्तर की समस्याओं को रेखांकित करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज जनता किसानों की बदहाली, बेकाबू बेरोजगारी, कमरतोड़ महंगाई, भीषण बिजली संकट, जर्जर सड़कों और चरमराती कानून-व्यवस्था जैसी बुनियादी समस्याओं से बुरी तरह जूझ रही है। समाजवादी पार्टी इन जनहित के मुद्दों को लगातार सड़क से लेकर सदन तक उठाती रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता के इस दमन और अन्याय के खिलाफ सपा कार्यकर्ताओं का संघर्ष थमेगा नहीं। लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करके सरकार जनता की आवाज को दबा नहीं सकती और न ही पार्टी कार्यकर्ता इस प्रकार के दबाव से डरने वाले हैं।
गन्ना किसानों की आवाज उठाने पर कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार भी रात से नजरबंद
कार्रवाई का यह सिलसिला केवल समाजवादी पार्टी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस के प्रांतीय नेता कुमुद गंगवार को भी रविवार रात लगभग 8:00 बजे उनके निरंजन कुंज स्थित आवास पर पुलिस ने नजरबंद कर दिया। दरअसल, कुमुद गंगवार ने रविवार को ही जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात कर यह मांग की थी कि उन्हें क्षेत्र के गन्ना किसानों की गंभीर समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने का समय दिलवाया जाए। कांग्रेस नेता ने बताया कि इस मांग के बाद ही रविवार रात अचानक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उनके घर पहुंचे और उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। कुमुद गंगवार ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना कोई गुनाह नहीं है। गन्ना किसानों के हक के लिए उनका आंदोलन हर हाल में जारी रहेगा और वे इस तरह की दमनकारी कार्रवाई से डरकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

भीम आर्मी, महिला सभा और पूरनपुर-बरखेड़ा के कई अन्य नेता भी किए गए नजरबंद
जैसे-जैसे मुख्यमंत्री के आगमन का समय नजदीक आ रहा है, हाउस अरेस्ट किए गए नेताओं की सूची लंबी होती जा रही है। ताजा जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष सौरभ भारतीय को भी उनके आवास पर नजरबंद कर दिया है। इसके अलावा, आशा वर्कर यूनियन की अध्यक्ष इदरीसन को भी पुलिस ने एहतियातन हिरासत/नजरबंद कर लिया है ताकि वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांगें न रख सकें।
ग्रामीण और विधानसभा क्षेत्रों में भी पुलिस की मुस्तैदी का असर साफ देखा जा रहा है।
पूरनपुर में जिला पंचायत सदस्य संजय खान और वरिष्ठ सपा नेता धनवंतरी को उनके आवास पर नजरबंद किया गया है।
बरखेड़ा क्षेत्र में बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट के दावेदार रामसनेही वर्मा, समाजवादी महिला सभा की जिला अध्यक्ष आशा वर्मा और वरिष्ठ सपा नेता शांति स्वरूप को भी पुलिस ने सोमवार सुबह से हाउस अरेस्ट कर रखा है।
जिले भर में विपक्षी दलों के दिग्गजों, महिला विंग की नेताओं और जनसंगठनों के अध्यक्षों पर हुई इस चौतरफा कार्रवाई से पूरे पीलीभीत में राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण और गर्माया हुआ है। विपक्ष इसे तानाशाही की पराकाष्ठा बता रहा है, वहीं प्रशासनिक अधिकारी इसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया जरूरी कदम मान रहे हैं।