सितारगंज। बैंक ऑफ इंडिया के एक रिकवरी एजेंट पर किसानों और खाताधारकों से ऋण जमा कराने के नाम पर 10.72 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एजेंट ने शाखा प्रबंधक के फर्जी हस्ताक्षर और मोहर वाली रसीदें देकर ग्राहकों को गुमराह किया। मामले में बैंक शाखा प्रबंधक की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बैंक ऑफ इंडिया, सितारगंज शाखा के प्रबंधक प्रमोद सिंह बिष्ट ने बताया कि 2 जून 2026 को नानकमत्ता के नगला निवासी खाताधारक पूरन सिंह ने शिकायत की कि उनके केसीसी ऋण खाते में जमा कराई गई राशि बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। जांच में बैंक अभिलेखों और ग्राहक द्वारा प्रस्तुत रसीदों में गंभीर विसंगतियां मिलीं।
शिकायत के अनुसार, पूरन सिंह ने 4 मई 2026 को अपने केसीसी खाते के नवीनीकरण के लिए रिकवरी एजेंट राहुल तिवारी को 1.65 लाख रुपये नकद दिए थे। आरोप है कि राहुल तिवारी ने शाखा प्रबंधक के फर्जी हस्ताक्षर और मोहर लगाकर रसीद तैयार कर उन्हें सौंप दी, लेकिन राशि बैंक खाते में जमा नहीं कराई।
प्रारंभिक जांच में इसी तरह की कई अन्य शिकायतें भी सामने आईं। प्रेम प्रकाश से दो लाख रुपये, भागीरथ प्रसाद से 1.05 लाख, मोहम्मद मुस्तकीम से दो लाख, धरम सिंह से 75 हजार, छोटे लाल से 1.12 लाख और गब्बर एंटरप्राइजेज से 2.15 लाख रुपये की कथित ठगी की पुष्टि हुई। सभी मामलों को मिलाकर करीब 10.72 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।
बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि राहुल तिवारी बैंक ऑफ इंडिया का कर्मचारी नहीं है। वह विजयलक्ष्मी नामक एजेंसी से जुड़ा था, जिसे बैंक के एनपीए खातों की रिकवरी और सेटलमेंट का कार्य सौंपा गया था। आरोप है कि उसने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर ग्राहकों का विश्वास जीता और बैंक के नाम का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
शाखा प्रबंधक ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की मांग की है। सीओ बीएस धौनी ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी रिकवरी एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।