नई दिल्ली ब्यूरो: दिल्ली में नीट-यूजी परीक्षा विसंगतियों को लेकर चल रहे देशव्यापी छात्र आंदोलनों और भारी राजनीतिक दबाव के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘मेरे युवा साथियों’ के नाम एक विस्तृत और भावुक पत्र साझा करते हुए अपने चार दशकों के सार्वजनिक व शैक्षणिक जीवन के संकल्पों को दोहराया और इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि 3 मई 2026 को आयोजित की गई नीट-यूजी की परीक्षा में जो अनियमितताएं पाई गईं, उससे उनके मन को भारी आघात पहुंचा है।
उन्होंने अपने आधिकारिक वक्तव्य में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने छात्रों के हितों की रक्षा के लिए त्वरित संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी, परीक्षा को निरस्त किया और भविष्य में शुचिता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2027 से इस प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा को पारंपरिक ओएमआर शीट व्यवस्था से मुक्त कर पूरी तरह कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में स्थानांतरित करने का नीतिगत निर्णय लिया है। निवर्तमान मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि देश के 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के भविष्य और परीक्षा की पारदर्शिता को बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी, जिसके चलते ‘व्होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच’ के समन्वय से विभिन्न मंत्रालयों व राज्य सरकारों के सहयोग द्वारा गत 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा का सुचारू आयोजन कराया गया, जिसके परिणाम भी 16 जुलाई को घोषित कर दिए गए थे। अपने पत्र के अंतिम हिस्से में धर्मेंद्र प्रधान ने बेहद कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि इस पूरी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर आसीन व्यक्तियों ने निरंतर मेधावी छात्रों को गुमराह करने और पूरी व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने का अनुचित प्रयास किया, जिससे आहत होकर वह यह कदम उठा रहे हैं, हालांकि उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार देश के किसी भी प्रतिभावान छात्र के साथ परीक्षा माफियाओं के कारण न्याय की बलि नहीं चढ़ने देगी।