पीलीभीत। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर के आह्वान पर शिक्षकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त अध्यापकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपे जाने के विरोध में आर-पार की जंग छेड़ दी है। शनिवार को जिला अध्यक्ष राजेश मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षकों ने गांधी स्टेडियम से शहीद दामोदर दास पार्क गैस चौराहा तक विशाल मशाल जुलूस निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। शिक्षक संघ की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार संसद में अध्यादेश लाकर 23 अगस्त 2010 और उत्तर प्रदेश सरकार के 27 जुलाई 2011 के नोटिफिकेशन से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से राहत प्रदान करे।
मशाल जुलूस के दौरान शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर चिंता व्यक्त की, जिसमें नियुक्ति तिथि पर विचार किए बिना सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिला महामंत्री मोहम्मद अकरम ने तर्क दिया कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षक तत्कालीन भर्ती नियमों और मानकों को पूर्ण कर सेवा में आए थे। इन अनुभवी शिक्षकों को शिक्षण कार्य करते हुए 15 से 35 वर्ष का लंबा समय हो चुका है और उन्हें समय-समय पर डाइट व बीआरसी स्तर पर नवीनतम शिक्षण गतिविधियों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। ऐसे में दशकों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों पर अब टीईटी परीक्षा थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

विरोध प्रदर्शन में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार से इस विसंगति को दूर करने की मांग की। मशाल जुलूस में यूटीए कोषाध्यक्ष के.के. सागर, शिराज अहमद, खेमपाल सिंह, रेहानुर्रहमान, धर्मेंद्र कुमार, मोहम्मद अतहर, शफकत अली और यूपीएसएस मंत्री उमेश कुमार गंगवार मुख्य रूप से शामिल रहे। इनके साथ ही जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष लाल करन, देवेंद्र कन्हैया, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के शिशु पाल, आलोक जैसवाल, नजमुल हसन कादरी, फहीम, वीरपाल गंगवार सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग कर सरकार को चेतावनी दी कि यदि अध्यादेश लाकर राहत नहीं दी गई, तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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