हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष को जनजागरण का अवसर बनाने के उद्देश्य से देश-विदेश में अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या दो दिवसीय राजस्थान प्रवास पर पिलानी और मण्ड्रेला पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न यज्ञीय आयोजनों में सहभागिता कर गायत्री परिजनों और कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि माता भगवती देवी शर्मा का जन्म शताब्दी वर्ष परम पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा उन्हें जीवन में उतारने का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष को केवल स्मरण तक सीमित न रखते हुए इसे व्यापक जनजागरण और रचनात्मक परिवर्तन का अभियान बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती वीरता, त्याग, तप और संस्कारों की धरती रही है। यहां की माटी में वह सामर्थ्य है, जो किसी भी रचनात्मक अभियान को जनआंदोलन में बदल सकती है। उन्होंने गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं से जन्म शताब्दी वर्ष के संदेश को युवाओं, परिवारों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
राजस्थान प्रवास के दौरान डॉ. पण्ड्या गायत्री परिवार के समर्पित कार्यकर्ता रहे स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद खरे के निवास पर भी पहुंचे। उन्होंने उनके परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और स्वर्गीय डॉ. खरे को पुष्प अर्पित कर भावांजलि दी।
मण्ड्रेला, झुंझुनू में आयोजित 108 कुण्डीय यज्ञ कार्यक्रम के अंतर्गत भव्य दीपयज्ञ महोत्सव में भी डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने सहभागिता की। उन्होंने ध्वजारोहण के साथ यज्ञ एवं दीप प्रज्वलन में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गायत्री दीप महायज्ञ अंतर्मन में सद्विचार, सद्भाव और सत्कर्मों का प्रकाश जगाने का संकल्प है।
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि राजस्थान की माटी से उठने वाली यह चेतना शांतिकुंज के संदेश के साथ देशभर में सकारात्मक परिवर्तन की ज्योति प्रज्वलित कर सकती है। उन्होंने गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं से समाज में सकारात्मक सोच, संस्कार और रचनात्मक चेतना के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजक मंडल की ओर से डॉ. चिन्मय पण्ड्या को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं, डॉ. पण्ड्या ने राजस्थान के वरिष्ठ गायत्री परिजनों को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न आदि भेंट कर सम्मानित किया।