सितारगंज | उत्तराखंड के खटीमा में ‘जनसरोकार’ की खबर दिखाने वाले पत्रकार दीपक फुलेरा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को सितारगंज के पत्रकारों ने एकजुट होकर महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (SDM) सितारगंज के माध्यम से सौंपा।
क्या है पूरा मामला?
ज्ञापन के अनुसार, खटीमा में ईटीवी भारत के पत्रकार दीपक फुलेरा ने गैस वितरण में हो रही अनियमितताओं और उपभोक्ताओं की परेशानियों को प्रमुखता से दिखाया था। आरोप है कि इस खबर से बौखलाकर भाजपा के एक कार्यकर्ता की तहरीर पर खटीमा कोतवाली में पत्रकार के खिलाफ धारा 353 (BNS) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पत्रकारों का कहना है कि यह ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ पर सीधा हमला है और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को डराने की कोशिश है।

ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें:
- निष्पक्ष जांच: पत्रकारों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- मुकदमा वापस लेना: पत्रकार दीपक फुलेरा पर दर्ज मुकदमे को तत्काल निरस्त किया जाए।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: गैस वितरण में धांधली करने वाले गैस एजेंसी प्रबंधकों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने सरकारी आदेशों की अवहेलना कर उपभोक्ताओं को परेशान किया।
- अवैध वसूली की जांच: होम डिलीवरी के नाम पर उपभोक्ताओं से की गई अतिरिक्त धन उगाही की भी उच्च स्तरीय जांच हो।
ये रहे मौजूद:
ज्ञापन सौंपने वालों में सितारगंज के वरिष्ठ पत्रकार रमेश यादव, अमर सिंह यादव, नारायण सिंह रावत, अहसान अंसारी, दीपक भारद्वाज, विकास गुप्ता, कासिम अंसारी, गुरनाम सिंह, चरन सिंह सरारी, लईक अंसारी, हनीफ बाबाए शेखर पंत, शंकर दत्त शर्मा, कफिल अहमद, सहित भारी संख्या में स्थानीय पत्रकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि पत्रकार का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
(संवाददाता-राजन मंडल)
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