सितारगंज। केंद्रीय कारागार सितारगंज में 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में एसपी अनुराग मलिक ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इस दौरान कारागार में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेता बंदियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बंदियों द्वारा गठित बैंड भी आकर्षण का केंद्र रहा।

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में कारागार प्रशासन की ओर से पिछले दिनों पुरुष और महिला बंदियों के लिए विभिन्न इनडोर और आउटडोर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। शतरंज, कैरम, बैडमिंटन और वॉलीबॉल सहित कई प्रतियोगिताओं में बंदियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रतियोगिताओं के विजेता बंदियों को एसपी अनुराग मलिक ने सम्मानित किया।

अधिकारियों ने कहा कि खेल गतिविधियों का उद्देश्य बंदियों में अनुशासन, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, टीम भावना और सकारात्मक सोच विकसित करना है। खेलों के माध्यम से बंदियों को मानसिक और शारीरिक रूप से बेहतर बनाने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

विद्यार्थियों ने एसपी मलिक और बंदियों को बांधी राखी

खटीमा स्थित निर्मला इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने केंद्रीय कारागार में देशभक्ति और भारतीय संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस की भावना को जीवंत किया।

विद्यार्थियों और बंदियों की सहभागिता से कार्यक्रम का माहौल भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना रहा। वहीं, आगामी रक्षाबंधन पर्व से पहले विद्यालय परिवार की ओर से एसपी अनुराग मलिक सहित बंदियों को राखियां बांधी गईं।

कारागार प्रशासन ने विद्यार्थियों की इस पहल को सामाजिक सहभागिता और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक प्रयास बताया।

अर्थदंड जमा कराकर बंदी की रिहाई का खोला रास्ता

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामाजिक सरोकार से जुड़ी पहल भी देखने को मिली। निर्मला इंटर कॉलेज, खटीमा ने अपनी सहयोगी सामाजिक संस्था के माध्यम से केंद्रीय कारागार सितारगंज में ऐसे बंदी को चिन्हित किया, जिसकी कारावास की सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन अर्थदंड जमा न होने के कारण उसकी रिहाई नहीं हो पा रही थी।

सामाजिक संस्था ने बंदी की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसके अर्थदंड की धनराशि जमा कराने की पहल की है। इससे उसकी रिहाई का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि समाज की सकारात्मक सहभागिता बंदियों के पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

केंद्रीय कारागार में बन रहा 50 बेड का अस्पताल

केंद्रीय कारागार सितारगंज और संपूर्णानंद शिविर खुली जेल के विस्तार एवं आधुनिकीकरण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। कारागार कार्मिकों के लिए नए आवास, बंदियों की बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए 50 बेड का अस्पताल, आधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, आधुनिक बेकरी इकाई और बंदियों से मिलने आने वाले परिजनों के लिए सुविधायुक्त प्रतीक्षालय सहित कई योजनाएं प्रस्तावित हैं।

इसके अलावा संपूर्णानंद शिविर खुली जेल में नई बैरकों, शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार पर भी कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कारागार व्यवस्था में सुरक्षा और अभिरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास को मजबूत करना है।

चारदीवारी विचारों को कैद नहीं कर सकती: वरिष्ठ अधीक्षक

वरिष्ठ अधीक्षक ने कहा कि कारागार की चारदीवारी शरीर को सीमित कर सकती है, लेकिन विचारों, सीखने की क्षमता और स्वयं को बदलने की इच्छा को कैद नहीं कर सकती। उन्होंने बंदियों से खेल, शिक्षा, कौशल विकास और प्रशिक्षण के अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सजा की अवधि को केवल समय काटने के रूप में नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत की तैयारी के अवसर के रूप में देखना चाहिए। बंदियों को नकारात्मक सोच, क्रोध और गलत प्रवृत्तियों से बाहर निकलकर सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ना चाहिए।

वरिष्ठ अधीक्षक ने कारागार स्टाफ से भी कहा कि जेल प्रशासन की जिम्मेदारी केवल सुरक्षित अभिरक्षा और अनुशासन बनाए रखने तक सीमित नहीं है। बंदियों को प्रशिक्षित कर बेहतर नागरिक के रूप में समाज की मुख्यधारा में वापस भेजना भी कारागार प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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