कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में सक्रिय अवैध मानव अंग तस्करी (किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट) के खिलाफ पुलिस और जांच एजेंसियों का ताबड़तोड़ एक्शन लगातार जारी है। इस अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय रैकेट की कड़ियों को जोड़ते हुए कानपुर पुलिस ने दो और शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान सैफुद्दीन और अखिलेश तिवारी के रूप में हुई है, जो चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े होने के बावजूद इस काले कारोबार में शामिल थे। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद इस हाई-प्रोफाइल किडनी रैकेट में सलाखों के पीछे पहुंचने वाले कुल आरोपियों की संख्या अब बढ़कर 13 हो गई है।

🔴 ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर से जुड़े थे तार, ट्रांसप्लांट के समय रहते थे मौजूद

पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी सैफुद्दीन और अखिलेश तिवारी पेशे से ओटी (ऑपरेशन थिएटर) टेक्नीशियन हैं। इनका मुख्य काम अस्पतालों के भीतर अवैध रूप से होने वाले किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशनों के दौरान सर्जनों और सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं की तकनीकी मदद करना था। कानपुर में हुए अवैध ट्रांसप्लांट के दौरान भी ये दोनों ऑपरेशन थिएटर के भीतर मुख्य भूमिका में मौजूद थे। ये शातिर अपराधी चिकित्सा व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध सर्जरी को अंजाम दिलवाने में गिरोह की मदद कर रहे थे।

🔴 सिंडिकेट का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस, कई बड़े नाम रडार पर

कानपुर पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों तकनीकी जानकारों की गिरफ्तारी से इस रैकेट के कई और चौंकाने वाले राज सामने आ सकते हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि सैफुद्दीन और अखिलेश तिवारी कानपुर और आसपास के किन-किन बड़े निजी अस्पतालों व डॉक्टरों के संपर्क में थे। इस गैंग के तार दिल्ली, यूपी और अन्य राज्यों के बड़े अस्पतालों से भी जुड़े पाए गए हैं, जहां गरीबों को पैसों का लालच देकर उनकी किडनी निकाली जाती थी और अमीर मरीजों को ऊंचे दामों में बेची जाती थी। पुलिस का दावा है कि मामले में गहन पूछताछ जारी है और जल्द ही इस सिंडिकेट से जुड़े कुछ बड़े डॉक्टरों और अस्पताल मालिकों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।


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