नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देशभर के अपने सभी संबद्ध स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब स्कूलों में कक्षा 6 से “तीसरी भाषा (R3)” की पढ़ाई को अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड ने साफ किया है कि यह व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी। 

7 दिन की ‘डेडलाइन’ और सख्त निर्देश

सर्कुलर में उन स्कूलों को कड़ी चेतावनी दी गई है जिन्होंने अब तक तीसरी भाषा के विकल्प को अपने पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया है। बोर्ड ने ऐसे स्कूलों को महज 7 दिन का समय दिया है ताकि वे इस नियम को तत्काल लागू कर सकें। यह कदम छात्रों को भाषाई रूप से अधिक सक्षम बनाने और भारतीय भाषाओं के प्रति गौरव बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। 

स्कूलो को मिली भाषा चुनने की आजादी

बोर्ड ने स्कूलों पर किसी विशेष भाषा का दबाव नहीं डाला है। सर्कुलर के अनुसार:

  • मान्यता प्राप्त भाषाएं: स्कूल भारत की किसी भी मान्यता प्राप्त भाषा (जैसे संस्कृत, उर्दू, मराठी, बंगाली, पंजाबी आदि) को ‘तीसरी भाषा’ के रूप में चुन सकते हैं।
  • स्वतंत्र विकल्प: स्कूल अपनी क्षेत्रीय आवश्यकता और छात्रों की रुचि के आधार पर भाषा का चयन करने के लिए स्वतंत्र हैं।

छात्रों पर क्या होगा असर?

अब छात्रों को अपनी पढ़ाई के दौरान हिंदी और अंग्रेजी के अलावा एक और भारतीय भाषा सीखनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों का मानसिक विकास होगा और वे देश की विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं से जुड़ सकेंगे।


आधुनिक दुनिया की दृष्टि:
शिक्षा प्रणाली में भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता देना एक सराहनीय कदम है। बहुभाषी ज्ञान आज के वैश्विक युग में छात्रों के लिए करियर के नए द्वार खोल सकता है। आधुनिक दुनिया न्यूज़ पोर्टल का मानना है कि इस बदलाव से हमारी सांस्कृतिक विरासत और मजबूत होगी।

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