मुंबई। देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही बहसों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय सात सदस्यीय समिति के गठन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस महत्वपूर्ण समिति की कमान सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है, जो इससे पहले उत्तराखंड में भी यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व कर चुकी हैं।
प्रस्तावित कानून के दायरे में राज्य के सभी नागरिकों के लिए, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों, विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और बच्चा गोद लेने जैसे बेहद महत्वपूर्ण सामाजिक मामलों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि यह नवगठित समिति राज्य सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने से पहले प्रस्तावित कानून के सभी कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक पहलुओं की गहराई से जांच करेगी। इस समिति में विभिन्न क्षेत्रों के कानूनविदों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि एक संतुलित ढांचा तैयार किया जा सके।
महाराष्ट्र सरकार के इस बड़े फैसले के बाद राज्य की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। माना जा रहा है कि इस कानून के लागू होने से राज्य में पर्सनल लॉ की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान सामाजिक नियम लागू हो जाएंगे। समिति समाज के विभिन्न वर्गों, धार्मिक संगठनों और आम जनता से भी सुझाव ले सकती है ताकि एक ऐसा मसौदा तैयार किया जा सके जो कानून के दायरे में पूरी तरह खरा उतरे। इस बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक कदम पर अब पूरे देश की नजरें टिक गई हैं।