नई दिल्ली/गुजरात | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पवित्र सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्मित उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर देशवासियों को संबोधित किया। ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री ने एक सोशल मीडिया पोस्ट और अपने संबोधन के जरिए सोमनाथ मंदिर को भारत के सभ्यतागत साहस, शाश्वत गौरव और अटूट भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक बताया।
आस्था की विजय का प्रतीक है सोमनाथ का ध्वज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेखांकित किया कि पवित्र सोमनाथ मंदिर के शिखर पर लहराता हुआ ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत की अडिग आस्था की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह ध्वज लाखों भारतीयों की सामूहिक चेतना की एक दिव्य घोषणा है, जो सदा देश की शान का गुणगान करता रहेगा और हर एक नागरिक को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा।
हमलावरों की सोच पर पीएम मोदी का तीखा प्रहार
इतिहास के पन्नों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से लगभग एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर पर पहला विदेशी हमला हुआ था। उन्होंने कहा, “ऐसे क्रूर हमलों को अंजाम देने वाले आक्रांताओं का मानना था कि वे मंदिर को तोड़कर इस महान देश की भूमि की आत्मा को चकनाचूर कर देंगे, लेकिन वे पूरी तरह गलत थे।”
डॉ. राजेंद्र प्रसाद के संदेश को किया याद
पीएम मोदी ने स्वतंत्र भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुए नवनिर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब इस मंदिर के द्वार दोबारा खुले, तो भारत ने पूरे विश्व को यह कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया था कि हमलावर भले ही समय के साथ इतिहास की धूल में विलीन हो गए हों, लेकिन भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा अमर है और इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। [1, 2]