पीलीभीत। उपेक्षा और गाद के कारण अस्तित्व खोती जा रही आदि गंगा गोमती नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों ने एक बार फिर गति पकड़ ली है। बुधवार को माधोटांडा स्थित उद्गम स्थल पर क्षेत्रीय विधायक बाबूराम पासवान और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा फावड़ा चलाकर खोदाई कार्य का शुभारंभ किया गया। इस पहल से वर्षों से सूखी पड़ी नदी के भविष्य को लेकर क्षेत्रवासियों में एक नई उम्मीद जगी है।
अभियान के शुभारंभ अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास, कलीनगर एसडीओ प्रमेश कुमार और खंड विकास अधिकारी हेमंत कुमार यादव सहित बड़ी संख्या में गोमती भक्त और ग्रामीण मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत नदी के करीब 47 किलोमीटर लंबे हिस्से की सफाई, खोदाई और चौड़ीकरण का कार्य किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य गाद हटाकर नदी की गहराई बढ़ाना है, ताकि वर्षा जल का संचयन हो सके और साल भर जल प्रवाह बना रहे। इस कदम से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि क्षेत्र के गिरते भूजल स्तर में भी सुधार आने की प्रबल संभावना है।
गौरतलब है कि पूर्व में भी तत्कालीन जिलाधिकारी अखिलेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में श्रमदान के जरिए नदी पुनरुद्धार की कोशिश की गई थी, लेकिन वह प्रयास मुकाम तक नहीं पहुँच सका था। यही वजह है कि स्थानीय ग्रामीण और गोमती ट्रस्ट से जुड़े लोग इस बार अभियान की निरंतरता को लेकर उत्साहित होने के साथ-साथ सतर्क भी हैं। फिलहाल, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की इस सक्रियता ने यह विश्वास दिलाया है कि यदि यह कार्य ईमानदारी से जारी रहा, तो लखनऊ की जीवनरेखा कही जाने वाली गोमती अपनी मूल धारा में एक बार फिर लहरें मारती नजर आएगी।
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