पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) ने सामाजिक सरोकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दिव्यांग बच्चों के लिए ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम को नियमित रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है। इस अनूठी पहल के अंतर्गत अब प्रत्येक बुधवार को जनपद के दिव्यांग बच्चों को निशुल्क जंगल सफारी के माध्यम से प्रकृति और वन्यजीवों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। पीलीभीत टाइगर रिजर्व देश का ऐसा पहला टाइगर रिजर्व बन गया है, जिसने दिव्यांग बच्चों के लिए निशुल्क भ्रमण की यह विशेष व्यवस्था शुरू की है। इस कार्यक्रम का औपचारिक आगाज़ 15 मार्च को प्रदेश के प्रधान वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख सुनील चौधरी और उनकी धर्मपत्नी सुनैना चौधरी द्वारा टाइगर रिजर्व मुख्यालय से हरी झंडी दिखाकर किया गया था।
प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम अब पूर्ण रूप से व्यवस्थित होकर 25 मार्च, बुधवार से विधिवत आरंभ होने जा रहा है। इसके तहत पीलीभीत टाइगर रिजर्व मुख्यालय से हर बुधवार को दिव्यांग बच्चों को जंगल की सैर कराई जाएगी। जनपद में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में लगभग 2700 दिव्यांग बच्चे अध्ययनरत हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से इस अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा। टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा इन बच्चों के लिए विशेष सफारी वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि वे बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से तराई के जंगलों और वहां के वन्यजीवों का दीदार कर सकें।
वन विभाग की यह सक्रियता केवल यहीं तक सीमित नहीं है। आगामी 27 मार्च को मुस्तफाबाद में एक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। इस दिन उत्तर प्रदेश की प्रमुख सचिव (वन) कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को जंगल भ्रमण के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी। पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन की इन कोशिशों का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी, विशेषकर समाज के वंचित और दिव्यांग बच्चों में संवेदनशीलता और जागरूकता पैदा करना है। सरकार की इस पहल से जहां बच्चों में उत्साह का माहौल है, वहीं संरक्षण के क्षेत्र में पीलीभीत का नाम देश के मानचित्र पर एक मानवीय चेहरे के साथ उभरा है।
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