पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने ‘हरित चौपाल’ नामक एक अनूठी योजना शुरू की है। इस पहल के तहत वन विभाग के अधिकारी सीधे गांवों में जाकर पेड़ों के नीचे ग्रामीणों के साथ संवाद करेंगे। उत्तर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने जानकारी दी कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीणों और वन विभाग के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया जा रहा है। अब तक प्रदेश भर में लगभग 26,000 हरित चौपालों का गठन किया जा चुका है। इन चौपालों में न केवल वनीकरण के लाभ बताए जाएंगे, बल्कि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। काश्तकारों और सामान्य नागरिकों को सरकारी लाभ कैसे मिले, इस पर विस्तृत मंथन होगा और चर्चाओं के आधार पर ‘मिनट्स’ तैयार कर उन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
​सुनील चौधरी के अनुसार, इस वर्ष प्रदेश में 275 करोड़ वृक्षारोपण का विशाल लक्ष्य रखा गया है, जिसे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत जन-आंदोलन के रूप में पूरा किया जाएगा। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए गोरखपुर में एक फॉरेस्ट्री और हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है, जबकि लखनऊ स्थित ‘अरण्य भवन’ को प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, वन्यजीव संरक्षण के लिए राज्य में चार नए रेस्क्यू सेंटर और सात बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने पर भी तेजी से काम चल रहा है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में जैव विविधता के संरक्षण और घायल वन्यजीवों की मदद के लिए बुनियादी ढांचों पर तेजी से काम चल रहा है। राज्य में 7 नए बायोडायवर्सिटी पार्क (जैव विविधता उद्यान) विकसित किए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना और लोगों को प्रकृति के करीब लाना है। ये पार्क प्रमुख रूप से गंगा नदी के किनारे हापुड़ (अलमगीरपुर) और बुलंदशहर (रामघाट) जैसे क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के मिर्जापुर (मोहनपुर) और सोनभद्र (हाथीनाला) में भी विशाल बायोडायवर्सिटी पार्क तैयार हो रहे हैं, जो अपनी प्राकृतिक पहाड़ियों और विविध वनस्पतियों के लिए जाने जाते हैं। रायबरेली और अन्य जनपदों में भी इन पार्कों का विस्तार किया जा रहा है ताकि स्थानीय आबादी को शुद्ध वातावरण मिल सके।
​वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रदेश में 4 नए रेस्क्यू सेंटर (वन्यजीव बचाव केंद्र) भी स्थापित किए जा रहे हैं। ये सेंटर उन क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं जहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना अधिक रहती है। इनमें मेरठ और हस्तिनापुर क्षेत्र में तेंदुए व अन्य जीवों के लिए अत्याधुनिक केंद्र, चित्रकूट और बांदा के बुंदेलखंडी हिस्से में प्रस्तावित रेस्क्यू सुविधा, तथा पीलीभीत के तराई बेल्ट में बफर जोन के पास एक अन्य सेंटर पर काम चल रहा है। साथ ही, मथुरा और आगरा बेल्ट में भालू व अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सुनील चौधरी ने बताया कि गोरखपुर में एक फॉरेस्ट्री और हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय का निर्माण अंतिम चरण में है, जबकि लखनऊ स्थित ‘अरण्य भवन’ को प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो पर्यावरण के अनुकूल वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण होगा।
वन विभाग अब अपने सुरक्षा बल को और भी अधिक सक्षम और आधुनिक बनाने की दिशा में अग्रसर है। सुनील चौधरी ने बताया कि वन बल को अन्य सैन्य बलों की तर्ज पर आधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता किया जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले सात-आठ वर्षों में वन विभाग में जितना विकास और सक्रियता देखी गई है, उतनी उन्होंने अपने पूरे करियर में पहले कभी नहीं देखी।

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