खबर वाराणसी से है कि काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर धधकती चिताओं के बीच भस्म से खेली जाने वाली ‘मसान की होली’ इस साल गंभीर कानूनी और धार्मिक विवादों में घिर गई है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के विरुद्ध खुद काशी के डोम राजा परिवार ने मोर्चा खोल दिया है।

श्मशान की गरिमा पर सवाल: क्या शास्त्रसम्मत है यह होली?

डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए इस भव्य आयोजन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि:

शास्त्रों का उल्लंघन: श्मशान वैराग्य और शांति का स्थान है, वहाँ शोर-शराबा और उत्सव मनाना शास्त्रों के विरुद्ध है।

मर्यादा का हनन: मणिकर्णिका घाट की अपनी एक गरिमा है, जिसे इस तरह के आयोजनों से ठेस पहुँच रही है।

बड़ी चेतावनी: “नहीं रुकी होली, तो थम जाएगा दाह संस्कार”

विश्वनाथ चौधरी ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस आयोजन को नहीं रोका गया, तो वे महाश्मशान पर मुखाग्नि और दाह संस्कार की प्रक्रिया को रोकने के लिए विवश होंगे। काशी में डोम राजा परिवार के बिना अंतिम संस्कार संभव नहीं माना जाता, ऐसे में यह चेतावनी प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गई है।

प्रशासन की बढ़ी धड़कनें, असमंजस में अधिकारी

इस ज्ञापन के बाद वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा है, तो दूसरी तरफ घाट के संरक्षक माने जाने वाले डोम राजा परिवार का कड़ा विरोध। फिलहाल अधिकारी दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि महाश्मशान की व्यवस्था प्रभावित न हो।

क्या है मसान की होली?

मान्यता है कि भगवान शिव रंगभरी एकादशी के अगले दिन मणिकर्णिका घाट पर अपने गणों के साथ चिता की भस्म से होली खेलते हैं। इसी मान्यता के चलते यहाँ ‘मसान की होली’ का आयोजन होता है, जिसे देखने दुनिया भर से लोग वाराणसी पहुँचते हैं।

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