उत्तरकाशी। टिहरी बांध प्रभावित ग्राम भल्डगांव में विस्थापन और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना 29वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से प्रभावित परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास को लेकर मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे पहले भी ग्रामीण आईआईटी रुड़की से कराए गए भू-सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर चुके हैं।
इसी क्रम में पुनर्वास निदेशक कार्यालय में एक्सपर्ट कमेटी, टीएचडीसी और पुनर्वास निदेशक के साथ बैठक हुई। बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता गोपीनाथ सिंह रावत के साथ ग्रामीण कमलू लाल, संदीप, रमेश और सुक्खा शामिल हुए। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने भल्डगांव समेत प्रभावित ग्रामसभाओं में भूस्खलन के आकलन के लिए कराए गए ड्रोन और मशीनरी सर्वे की रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सर्वे से अब तक कोई निर्णायक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि आईआईटी रुड़की के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीक से सर्वे कराया गया था, ऐसे में उसकी स्पष्ट और निर्णायक रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता गोपीनाथ सिंह रावत ने पुनर्वास निदेशक, जिलाधिकारी टिहरी और टीएचडीसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावितों के नाम पर आने वाले बजट के इस्तेमाल में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और टीएचडीसी का पक्ष इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।
गोपीनाथ सिंह रावत ने कहा कि टिहरी झील के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण रिम एरिया के गांवों में भूस्खलन की समस्या ग्रामीणों के सामने लगातार बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि प्रभावितों के नाम पर खर्च किए गए धन, आईआईटी रुड़की के सर्वे की प्रक्रिया और उसकी रिपोर्ट की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक भल्डगांव के विस्थापन और पुनर्वास को लेकर ठोस एवं निर्णायक फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। इससे पहले भी प्रशासन और पुनर्वास विभाग की ओर से ग्रामीणों से धरना स्थगित करने अथवा स्थल बदलने का आग्रह किया गया था, जिसे ग्रामीणों ने स्वीकार नहीं किया था।