रूद्रपुर। श्रमिक संयुक्त मोर्चा उधमसिंहनगर के बैनर तले श्रमिक, किसान, आशा, भोजनमाता सहित कई क्षेत्र के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने आज हड़ताल में उतरकर गांधी पार्क में सभा की और सरकार से 4 श्रम संहिताओं सहित अन्य काले कानूनों को रद्द करने की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 4 श्रम संहिताएं लाकर केन्द्र की मोदी सरकार मजदूर वर्ग को पूंजीपतियों का गुलाम बना देना चाहती है। इन 4 श्रम कोड्स के माध्यम से मालिक मजदूरों से कम वेतन पर ज्यादा घंटे काम लेगा। नए लेबर कोड्स में 8 घंटे काम के नियम को बदलकर 12 घंटे कर दिया गया है। नए श्रम कोड्स में उद्योगों में श्रमिकों के स्थाई होने के नियम को खत्म करके फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट का नियम लाया गया है। इन श्रम कोड्स में मजदूरों के यूनियन बनाने के अधिकार को खत्म कर दिया गया है।वक्ताओं ने कहा यह हड़ताल कार्रवाई एक बहुत ही नाजुक स्थिति में हो रही है जब केंद्र सरकार,ट्रेड यूनियनों को नियंत्रित करने और कमजोर करने और भारतीय श्रमिक वर्ग आंदोलन को पूंजी के हमले के सामने निहत्था करने के लिए चार श्रम संहिताएं लेकर आई है।ये श्रम कोड्स कानून की उचित प्रक्रिया के बिना,हितधारकों के साथ कोई परामर्श किए बिना, भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित किए बिना, अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों की अवहेलना करते हुए लाई गईं जिसके लिए भारत एक राष्ट्र राज्य के रूप में हस्ताक्षरकर्ता है। नोटिफाइड लेबर कोड और ड्राफ्ट नियम, सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करने, हड़ताल का अधिकार छीनने, लगभग 70 प्रतिशत फैक्ट्रियों को लेबर कानून के दायरे, रेगुलेशन और मालिकों की जिम्मेदारियों से बाहर करने,मजदूरों को मालिकों की दया पर छोड़ने, ज्यादातर मजदूरों को ऑक्यूपेशनल सेफ्टी और सोशल सिक्योरिटी की सुरक्षा से बाहर करने के लिए हैं। ये सुलह..निर्णय प्रक्रियाओं के जरिए मौजूदा अधिकारों और मजदूरी की सुरक्षा को लगभग खत्म कर देंगे। मजदूरी की परिभाषा में भी बदलाव का प्रस्ताव है, ट्रेड यूनियन एक्ट को खत्म किया जाना है और प्रस्तावित कोड यूनियन बनाने को मुश्किल.असंभव बना देगा जिससे मनमाने ढंग से डी-रजिस्ट्रेशन और डी-रिकग्निशन होगा, कलेक्टिव ट्रेड यूनियन गतिविधियों के खिलाफ बदले की भावना से सजा देने वाली कार्रवाई होगी और मालिकों को अपनी मर्जी से अपने कानूनी दायित्वों का उल्लंघन करने की छूट मिलेगी।वक्ताओं ने कहा कि कुल मिलाकर मोदी सरकार सिर्फ मजदूरों के खिलाफ ही काले कानून नहीं बना रही बल्कि इस देश के अन्नदाता किसान को बर्बाद करने के लिए और खेती किसानी को कॉरपोरेट के हाथों गिरवी रखने के लिए बीज अधिनियम जैसे किसान विरोधी कानून लाने की तैयारी में है। अमेरिका से की गई टैरिफ डील से देश के किसानों और देश के स्वाभिमान को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने का काम मोदी सरकार ने किया है। अपने फायदे के लिए कि गई ट्रेड डील से अमेरिका अपने अनाज को भारत में बेचकर भारत के किसानों को तबाह करने का काम कर रही है। सरकार भारतीय और विदेशी मूल के बड़े कॉर्पोरेट्स के फायदे के लिए सभी रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं जैसे रेलवे, बंदरगाह और डॉक, कोयला खदानों, तेल, स्टील, रक्षा, सड़क मार्ग, हवाई अड्डे, बैंक, बीमा, दूरसंचार, डाक, परमाणु ऊर्जा, बिजली उत्पादन और आपूर्ति आदि के निजीकरण और बिक्री का अपना एजेंडा जारी रखे हुए है जिससे स्वदेशी औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ रही है। बजट 2026-2027 भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। बैंकों में सुधार के लिए उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का साफ संकेत है। सभा के बाद बाजार में जुलूस निकाला गया। सभा को सीएसटीयू अध्यक्ष मुकुल, अध्यक्ष श्रमिक संयुक्त मोर्चा दिनेश तिवारी,इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट,भाकपा (माले) जिला सचिव ललित मटियाली,जनकवि बल्ली सिंह चीमा,किसान यूनियन उग्राहा के नेता अवतार सिंह,भूमि बचाओ आंदोलन के नेता जगतार सिंह बाजवा, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष गंगाधर नौटियाल, ऐक्टू जिला सचिव अनिता अन्ना, सीटू के जगदेव सिंह, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष रीता कश्यप, ममता पानू, माकपा नेता राजेंद्र सिंह सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। सभा में उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, प्रगतिशील भोजन माता संगठन, आर.एम.एल एम्प्लाइज यूनियन, बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन, पीबीजी वर्कर्स यूनियन सितारगंज,सनसेरा श्रमिक संगठन,नील मेटल कामगार संगठन, ऑटो लाइन एम्प्लाइज यूनियन, ऐरा श्रमिक संगठन, मंत्री मेटल वर्कर्स यूनियन, नेस्ले कर्मचारी संगठन, डॉल्फिन मजदूर संगठन, बेलराइज वर्कर्स यूनियन, भगवती एम्प्लाइज यूनियन, महेंद्र कर्मकार यूनियन, याजाकी वर्कर्स यूनियन, कारोलिया लाइटिंग संगठन, एलजीबी वर्कर्स यूनियन के सैकड़ों लोग मौजूद थे।