-​आर्य समाज मंदिर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई स्वामी दयानंद की 202वीं जयंती

​पीलीभीत। स्टेशन रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में आयोजित ‘ऋषि बोधोत्सव-2026’ के दूसरे दिन महर्षि दयानंद सरस्वती की 202वीं जन्म जयंती अत्यंत श्रद्धा और वैदिक परंपरा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक के ब्रह्मत्व में विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुए भव्य यज्ञ से हुआ। इस पवित्र यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में पी.एल. गंगवार, करुणाशंकर सक्सेना, यशपाल आर्य और मुकेश कुमार गंगवार ने आहुतियां समर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की।
​यज्ञ के पश्चात उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती का संपूर्ण जीवन वेदों के आदर्शों पर आधारित था। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और पाखंड का निर्भीकता से खंडन कर एक समरस और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। आचार्य ने जोर देकर कहा कि महर्षि दयानंद के “वेदों की ओर लौटो” के उद्घोष ने न केवल धार्मिक चेतना जगाई, बल्कि उनके विचारों से प्रेरित होकर ही देश के असंख्य क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना बलिदान दिया।


​बरेली से पधारे भजनोपदेशक नेत्रपाल सिंह आर्य ने भजनों के माध्यम से महर्षि के उपकारों का स्मरण कराया और श्रोताओं को अपनी सनातन संस्कृति की जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने महर्षि के बताए सत्य और सात्विकता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रधान आचार्य हरीबहादुर, मंत्री वासुदेव गंगवार, कोषाध्यक्ष माखनलाल आर्य, जी.एल. शर्मा, डॉ. दीपक गंगवार, तेज नारायण आर्य, देवदत्त, रामप्रकाश मिश्रा, बेचेलाल और मुनीन्द्र सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आर्य समाज के मंत्री वासुदेव गंगवार ने बताया कि यह ऋषि बोधोत्सव कार्यक्रम आगामी 15 फरवरी तक प्रतिदिन सुबह और शाम आयोजित किया जाएगा।

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