​पीलीभीत। अपनी लंबित मांगों और सरकार की नीतियों के विरोध में गुरुवार को पीलीभीत के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स ने पूर्ण हड़ताल रखी। उत्तर प्रदेश एमएसआरसीई से संबद्ध स्थानीय संगठन ने केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध ‘फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट’ और चार नए लेबर कोड्स को लेकर है, जिन्हें संगठन ने मजदूर विरोधी और आधुनिक गुलामी का प्रतीक बताया है।
​हड़ताल के दौरान एमआर साथियों ने प्रमुखता से मांग उठाई कि ‘एस.पी.ई. एक्ट 1976’ को कड़ाई से लागू किया जाए और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हो रहे हमलों को तत्काल बंद किया जाए। एसोसिएशन ने कार्यस्थल पर ई-गैजेट्स के जरिए की जा रही अवैध निगरानी और दबावपूर्ण प्रबंधन शैली पर कड़ा ऐतराज जताया। ज्ञापन में दवाओं पर से सभी प्रकार के जीएसटी हटाने, सरकारी अस्पतालों में कार्य करने की सुचारु अनुमति देने और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए देश की जीडीपी का कम से कम 5% हिस्सा आवंटित करने की मांग भी शामिल की गई है।


​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अध्यक्ष हितेश शुक्ला ने कहा कि कंपनियों द्वारा किया जा रहा किसी भी प्रकार का उत्पीड़न अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस अवसर पर संगठन के सह-सचिव विकास गंगवार सहित दलजीत सिंह, आशीष दीक्षित, आशीष छेत्री, रवि कुमार, मिथुन गंगवार, नन्हें लाल वर्मा, उमेश वर्मा, सुभाष, अजय कुमार, आयुष तिवारी, सुनील कुमार और महेश राठौर समेत बड़ी संख्या में प्रतिनिधि उपस्थित रहे। हड़ताल के कारण दिन भर दवाओं की मार्केटिंग और वितरण का कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा।

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