विधि संवाददाता, पीलीभीत। चार लाख रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में सिविल जज (जू.डि.)/त्वरित न्यायालय/न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष सिंह की अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और आठ लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को चार माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अदालत में दाखिल परिवाद के अनुसार, ग्राम बाजारगंज पिपरिया मजरा निवासी चरनजीत सिंह ने वीर सिंह से कृषि भूमि खरीदने का सौदा 15 लाख रुपये में किया था। परिवादी के अनुसार, उसने आरोपी को अलग-अलग किश्तों में कुल चार लाख रुपये दिए थे। बाद में बैनामा कराने को कहने पर आरोपी कथित तौर पर टालमटोल करता रहा और बाद में जमीन बेचने से मना कर दिया।
रुपये वापस मांगने पर आरोपी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की कदेरचौरा, पूरनपुर शाखा का चार लाख रुपये का चेक 6 जुलाई 2024 को जारी किया। परिवादी ने चेक को भुगतान के लिए बैंक में लगाया, लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया।
चेक बाउंस होने के बाद परिवादी की ओर से आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया। नोटिस के बावजूद रकम वापस नहीं किए जाने पर चरनजीत सिंह ने अदालत में परिवाद दाखिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से परिवादी चरनजीत सिंह की गवाही के साथ चेक और अन्य संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी वीर सिंह को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी माना।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामला वर्ष 2024 से लंबित है और चेक की धनराशि अब तक अदा नहीं की गई है। परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को परिवीक्षा का लाभ दिया जाना उचित नहीं है।
अदालत ने आठ लाख रुपये के अर्थदंड में से 50 हजार रुपये राज्य सरकार के पक्ष में जमा करने तथा शेष 7.50 लाख रुपये परिवादी को वाद खर्च समेत क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का आदेश दिया है। साथ ही अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर आरोपी को चार माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।