विधि संवाददाता,​ पीलीभीत। थाना सुनगढ़ी क्षेत्र में एक विवाहिता को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार-चतुर्थ ने आरोपी सास की अग्रिम जमानत याचिका को सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद अपराध को बेहद गंभीर प्रकृति का माना और आरोपी महिला को अग्रिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
​अभियोजन कथानक के अनुसार, वादी हेमंत वर्मा ने थाना सुनगढ़ी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी पुत्री निशा वर्मा का विवाह करीब सात वर्ष पूर्व ग्राम पकड़िया नौगवां निवासी कपिल मिश्रा के साथ प्रेम विवाह के रूप में हुआ था। आरोप है कि शादी के बाद से ही निशा का पति और ससुराल के अन्य सदस्य उसे दहेज आदि के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इस प्रताड़ना से तंग आकर निशा ने २५ जून २०२६ को महिला थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसके बाद वादी को सूचना मिली कि उनकी पुत्री की तबीयत बहुत खराब है। जब वे एस.के. अग्रवाल अस्पताल पहुंचे, तब तक निशा की मृत्यु हो चुकी थी और ससुराल वाले उसके शव को घर भिजवाकर वहां से भाग गए थे। आरोप है कि निशा ने अपने पति कपिल मिश्रा और सास कुसुम कौर की प्रताड़ना से तंग आकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
​न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपी सास कुसुम कौर की ओर से तर्क दिया गया कि उनके पुत्र व पुत्रवधू का विवाह वर्ष २०१८ में हुआ था और वे उत्तराखंड में रहते थे तथा घटना से महज दो दिन पहले ही वहां से लौटे थे, इसलिए उनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) महेंद्र पाल गंगवार ने जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए दलील दी कि प्रताड़ना के चलते ही एक विवाहिता को असमय अपनी जान गंवानी पड़ी। अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपी की भूमिका को देखते हुए कुसुम कौर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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