विधि संवाददाता,पीलीभीत। सत्रह वर्ष पुराने जहरीली शराब बनाने और गैंगस्टर एक्ट के एक गंभीर मामले में विशेष अदालत ने अपना मुख्य फैसला सुना दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) अनु सक्सेना ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी कामता प्रसाद को दोषी पाया है। अदालत ने दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और साथ ही सोलह हजार रुपये के अर्थदंड (जुर्माने) से दंडित किया है। इस लंबे चले मुकदमे के दौरान एक अन्य सह-आरोपी छोटे लाल की मृत्यु हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2009 का है। थाना बिलसंडा में तत्कालीन आबकारी निरीक्षक आदेश कुमार वर्मा ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, 22 अप्रैल 2009 को उप-निरीक्षक (SI) मनबीर सिंह पुलिस बल के साथ क्षेत्र में गश्त पर थे। इसी दौरान गौहनिया तिराहे पर एक मुखबिर ने सूचना दी कि ग्राम गौहनिया में कामता प्रसाद के घर के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध और कच्ची शराब तैयार की जा रही है। सूचना में यह भी बताया गया कि शराब का नशा तेज करने के लिए उसमें यूरिया जैसा जहरीला पदार्थ मिलाया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
मुखबिर की इस सटीक सूचना पर पुलिस टीम ने तत्काल कामता प्रसाद के घर पर दबिश दी। पुलिस जब घर के भीतर दाखिल हुई, तो आंगन में ईंटों के चूल्हे पर एक कनस्तर चढ़ा हुआ था, जिसके ऊपर मिट्टी की हंडिया रखी थी। वहां से एक प्लास्टिक पाइप के जरिए प्लास्टिक के डिब्बे में अवैध शराब उतारी जा रही थी, जबकि दूसरा व्यक्ति स्टील के मग्गे से पतीली का पानी बदल रहा था। पुलिस ने घेराबंदी करके मौके से कामता प्रसाद और छोटे लाल को रंगे हाथों दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके से 15 लीटर अवैध कच्ची शराब, 300 ग्राम यूरिया और शराब बनाने के उपकरण बरामद किए थे।
पुलिस ने इस बरामदगी के बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान आरोपियों के कृत्य को देखते हुए मामले में गैंगस्टर एक्ट की बढ़ोतरी की गई और पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार शुक्ल ने प्रभावी पैरवी की और आरोपी को सख्त सजा दिलाने के लिए न्यायालय के समक्ष कई गवाह व ठोस सबूत पेश किए। हालांकि, आरोपी कामता प्रसाद ने खुद को निर्दोष बताते हुए दलीलें दीं, लेकिन अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उसे दोषी करार दिया और सजा मुकर्रर की।