अनंतपुरमु। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु में आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनने और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने का विश्वास व्यक्त किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संस्थान की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता समावेशी एवं समानतामूलक विकास की भावना को दर्शाती है।

उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह उपलब्धि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम, समर्पण और दृढ़ निश्चय का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और समाज के सहयोग का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए वंचित वर्ग के सशक्तीकरण के लिए कार्य करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के दौर में सीखने की प्रक्रिया डिग्री प्राप्त करने के बाद भी निरंतर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीकों को अपनाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और नए विचारों के प्रति खुले मन से आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सीखने की निरंतर इच्छा, नवाचारी सोच और मानसिक लचीलापन ही युवाओं को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगा। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को ईमानदारी, करुणा, समानुभूति और प्रकृति के प्रति प्रेम जैसे नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता से ही साकार होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने चुने हुए क्षेत्र में पूरी लगन, ईमानदारी और उत्कृष्टता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

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