कानपुर। उत्तर प्रदेश की कानपुर चकेरी पुलिस और पूर्वी जोन सर्विलांस टीम ने एक बेहद बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए 3200 करोड़ रुपये के देशव्यापी फर्जी फर्म घोटाले (GST/Tax Fraud) में शामिल 50 हजार रुपये के इनामी शातिर अपराधी फैज को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस टीम ने फैज को लखनऊ के पॉश इलाके अलीगंज से घेराबंदी कर दबोचा। यह आरोपी इस संगठित सिंडिकेट के मुख्य सरगना और अपने पिता के साथ मिलकर इस अरबों रुपये के काले खेल को अंजाम दे रहा था।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी और सिंडिकेट के काम करने के तरीके से जुड़े मुख्य विवरण नीचे दिए गए हैं:
‘पप्पू छुरी’ का बेटा और सिंडिकेट का अहम मोहरा है फैज
- सरगना के साथ सांठगांठ: गिरफ्तार किया गया फैज इस पूरे महाघोटाले के मुख्य सरगना महफूज अली उर्फ ‘पप्पू छुरी’ का बेटा है। वह अपने पिता के इस संगठित आर्थिक अपराध सिंडिकेट में मुख्य सहयोगी की भूमिका निभा रहा था और काफी समय से फरार चल रहा था, जिस पर पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
- चकेरी पुलिस और सर्विलांस को सफलता: कानपुर की चकेरी थाना पुलिस और पूर्वी जोन की सर्विलांस टीम लगातार इसके ठिकानों पर नजर रख रही थी। सटीक सर्विलांस लोकेशन मिलने के बाद टीम ने लखनऊ के अलीगंज में छापा मारकर इसे गिरफ्तार कर लिया।
गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को बनाते थे शिकार
- सरकारी योजनाओं का झांसा: यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से समाज के सबसे निचले तबके, यानी गरीब, मजदूर और कम पढ़े-लिखे लोगों को अपना निशाना बनाता था। गिरोह के सदस्य इन भोले-भले लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, लोन दिलाने या आर्थिक मदद का झांसा देकर फंसाते थे।
- दस्तावेज हड़पकर खोलते थे फर्जी खाते: योजनाओं का लालच देकर यह सिंडिकेट उन गरीबों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण निजी दस्तावेज ले लेता था। इसके बाद उन कागजातों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी फर्में (Shell Companies) बनाई जाती थीं और विभिन्न बैंकों में फर्जी खाते खुलवाए जाते थे, जिनका इस्तेमाल अरबों रुपये के ट्रांजैक्शन और टैक्स चोरी के लिए किया जाता था।
3200 करोड़ का साम्राज्य, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कस रहा शिकंजा
- अंतरराज्यीय सिंडिकेट: जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने फर्जी फर्मों के जरिए अब तक करीब 3,200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय फ्रॉड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फर्जीवाड़ा किया है।
- ईडी की रडार पर मामला: इस संगठित सिंडिकेट के तार देश के कई राज्यों और बड़े कॉरपोरेट्स से जुड़े होने के कारण अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की कड़ियों को गहराई से खंगाल रही है। ईडी इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के कोण और अवैध संपत्तियों की जांच कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में कई और बड़ी गिरफ्तारियां होना तय माना जा रहा है।