विधि संवाददाता,​पीलीभीत। भगाकर शादी करने के बाद पहली पत्नी व परिजनों के साथ मिलकर दूसरी पत्नी की जहर देकर हत्या करने के मामले में न्याय विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जनपद सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने मामले की गंभीरता और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों को देखते हुए मुख्य आरोपी पति की जमानत याचिका को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले से पीड़िता के परिवार को कानूनी न्याय की आस बंधी है।
​प्रेम प्रसंग के बाद मंदिर में की थी शादी
अभियोजन कथानक के अनुसार, थाना माधोटांडा क्षेत्र के ग्राम फैजुल्लागंज निवासी सर्वेश उर्फ छोटू करीब छह माह पूर्व पुष्पा देवी की पुत्री मनीषा को भगाकर ले गया था। इस संबंध में मृतका की मां ने माधोटांडा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस प्रशासन द्वारा बरामद किए जाने के बाद मनीषा को न्यायालय में पेश किया गया था, जहां उसने सर्वेश उर्फ छोटू के पक्ष में बयान दिए। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर वह सर्वेश के साथ चली गई और दोनों ने मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद से ही दोनों पति-पत्नी के रूप में रहने लगे थे।
​पहली पत्नी और परिजनों पर प्रताड़ना व हत्या का आरोप
शादी के बाद मनीषा अपने पति सर्वेश उर्फ छोटू, उसकी पहली पत्नी शशिवाला, सास शकुंतला देवी और ससुर रामविलास के साथ रहने लगी। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही इन सभी लोगों ने मिलकर मनीषा का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करना शुरू कर दिया। प्रताड़ना का यह दौर यहीं नहीं थमा, बीती 25 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 12 बजे मनीषा की मां पुष्पा देवी को सूचना मिली कि उक्त सभी आरोपियों ने मिलकर उनकी बेटी मनीषा को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया है। पुलिस ने मृतका की मां की तहरीर के आधार पर संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी।
​अदालत में जमानत का पुरजोर विरोध
जेल में बंद मुख्य आरोपी सर्वेश उर्फ छोटू की ओर से जनपद सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार के न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) महेंद्र पाल गंगवार ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने अभियोजन का पक्ष पुरजोर तरीके से प्रस्तुत करते हुए दलील दी कि आरोपी ने साजिशन इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया है, इसलिए उसे जमानत का कोई अधिकार नहीं है। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपनी ओर से दलीलें पेश कीं। न्यायालय ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद अपराध को गंभीर प्रवृत्ति का माना और आरोपी सर्वेश उर्फ छोटू की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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