पीलीभीत। आधुनिक तकनीक और सही समय पर लिए गए फैसले किस तरह खेती को मुनाफे का सौदा बना सकते हैं, इसका उदाहरण पीलीभीत के एक प्रगतिशील किसान ने पेश किया है। सोमवार को गन्ना विकास परिषद पीलीभीत के अंतर्गत ग्राम महुआ के प्रगतिशील कृषक राकेश बाबू (पुत्र बनवारी लाल) के खेत पर गन्ना पर्यवेक्षक मनोज कुमार पाठक ने दौरा किया। वहाँ किसान द्वारा किए गए बेहतरीन पेड़ी प्रबंधन को देखकर विभागीय अधिकारियों ने उनकी सराहना की। कृषक राकेश बाबू के खेत में गन्ने की उन्नत व अगेती प्रजाति कोलख-14201 की पेड़ी फसल पूरी तरह लहलहा रही है, जो उनकी कड़ी मेहनत और सही तकनीकी प्रबंधन को दर्शाती है।
मई की भीषण गर्मी में कंसुआ कीट से ऐसे मिली सुरक्षा
निरीक्षण के दौरान गन्ना पर्यवेक्षक मनोज कुमार पाठक ने बताया कि मई के महीने में तेज धूप और अत्यधिक गर्मी के कारण गन्ने की फसल में कंसुआ (अर्ली सूट बोरर) कीट का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। इस जोखिम को भांपते हुए प्रगतिशील किसान राकेश बाबू ने मई के प्रथम सप्ताह में ही ‘कोराजन’ दवा का इस्तेमाल कर लिया था। यह समय कीटों की रोकथाम और गन्ने की शुरुआती ग्रोथ बढ़ाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। सही समय पर किए गए इस उपचार के कारण वर्तमान में उनकी फसल पूरी तरह स्वस्थ, निरोगी और कीट-मुक्त है।
कोराजन के सही इस्तेमाल और ड्रेंचिंग की विधि
विभागीय विशेषज्ञ के अनुसार, कोराजन गन्ने को शुरुआती तना छेदक और चोटी बेधक जैसे खतरनाक व नुकसानदेह कीटों से लंबे समय तक सुरक्षित रखता है। गन्ने की बेहतर सुरक्षा के लिए 150 मिलीलीटर कोराजन प्रति एकड़ की दर से पौधों की जड़ों के पास ड्रेंचिंग (जड़ों में डालना) करने की तकनीक सबसे प्रभावी रहती है। इस विधि से दवा सीधे जड़ों तक पहुँचती है, जिससे पौधों में जबरदस्त फुटाव (कल्ले निकलना) होता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कोराजन देने के बाद खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे, जिसके लिए हल्की सिंचाई अनिवार्य है ताकि दवा का असर जड़ों तक पूरी तरह पहुँच सके।
उन्नत खेती से लागत में कमी और पैदावार में बढ़ोतरी
अनुभवी किसान राकेश बाबू ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि गन्ने की बेहतर उपज हासिल करने के लिए पेड़ी फसल का शुरुआती दिनों में खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। वहीं, मामले पर जानकारी देते हुए जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम भार्गव ने बताया कि गन्ना विभाग की ओर से किसानों को समय-समय पर कीट प्रबंधन और उन्नत कृषि पद्धतियों की सही जानकारियां दी जा रही हैं। जिला गन्ना अधिकारी ने कहा कि प्रसन्नता की बात है कि क्षेत्र के किसान इन विभागीय परामर्शों और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उन्नत खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे न सिर्फ उनकी लागत घट रही है बल्कि पैदावार में भी शानदार बढ़ोतरी हो रही है।