सितारगंज (उधम सिंह नगर)। जिला उप चिकित्सालय सितारगंज में चिकित्सकों की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराई गई एक गर्भवती महिला की डॉक्टरों की कथित अनदेखी के कारण मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद मृतका के परिजनों, ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया और हंगामा काटा। अस्पताल में बढ़ते तनाव और भारी भीड़ को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, जो मामले को शांत कराने की कोशिशों में जुटा है।


रात में डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत, डॉक्टरों ने झाड़ा पल्ला

जानकारी के अनुसार, शक्तिफार्म के तिलियापुर गांव निवासी क्षेत्र पंचायत सदस्य के भाई सिकेन्दर की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर सितारगंज जिला उप चिकित्सालय लाया गया था। अस्पताल में रात के समय महिला की डिलीवरी हुई, जिसके कुछ घंटे बाद ही उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों का गंभीर आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने महिला को क्रिटिकल कंडीशन में संभालने या सही आपातकालीन इलाज देने के बजाय, तुरंत अपना पल्ला झाड़ते हुए उन्हें स्थानीय एक निजी अस्पताल (Private Hospital) ले जाने की सलाह दे दी।

रेफरल के चक्रव्यूह में फंसी जिंदगी, रास्ते में तोड़ा दम

डॉक्टरों की बात मानकर बेहद डरे हुए परिजन आनन-फानन में महिला को उपचार के लिए स्थानीय एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब उस निजी अस्पताल ने भी गंभीर हालत देखकर महिला को भर्ती करने से साफ मना कर दिया और उन्हें कहीं अन्य जगह (हायर सेंटर) ले जाने को कह दिया। इसके बाद बेबस परिजन तड़पती हुई महिला को रुद्रपुर ले जाने लगे, लेकिन दो-दो अस्पतालों की इस लेती-देती और रेफरल के खेल में काफी समय बर्बाद हो चुका था। रुद्रपुर पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला ने दम तोड़ दिया। प्रसूता की मौत की खबर मिलते ही पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया।

निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने वाले ‘रेफरल रैकेट’ पर उठे सवाल

जैसे ही इस दर्दनाक घटना की सूचना तिलियापुर गांव के ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को लगी, बड़ी संख्या की संख्या में लोग सितारगंज जिला उप चिकित्सालय पहुंच गए। ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ गहरा आक्रोश जताते हुए जोरदार नारेबाजी की और सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई की मांग की।

यह पहली बार नहीं है जब सितारगंज स्वास्थ्य विभाग इस तरह विवादों के घेरे में आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में गंभीर मरीजों को सही इलाज देने के बजाय सीधे निजी अस्पतालों में रेफर करने के कई चौंकाने वाले मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात

अस्पताल में बढ़ते तनाव और भारी भीड़ को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, जो मामले को शांत कराने की कोशिशों में जुटा है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का पक्ष

इधर, हंगामे के चलते स्वास्थ्य अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका है। जैसे ही उनका पक्ष मिलेगा उससे अवगत करा दिया जाएगा।


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