​पीलीभीत। तराई के जंगलों से सटे गांवों में आए दिन होने वाले मानव-हाथी संघर्ष को रोकने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने एक निर्णायक कार्ययोजना तैयार की है।
प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके के नेतृत्व में आगामी 06 फरवरी 2026 से दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। विश्व प्रकृति निधि के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कतर्नियाघाट के सुप्रसिद्ध हाथी विशेषज्ञ दबीर हसन मुख्य प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित रहेंगे। वे अपने दशकों के अनुभव से पीलीभीत के अधिकारियों और ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार और संघर्ष प्रबंधन के वैज्ञानिक गुर सिखाएंगे।
विश्व प्रकृति निधि-भारत के तकनीकी सहयोग से आयोजित होने वाला यह प्रशिक्षण दो चरणों में होगा।
प्रथम दिन (06 फरवरी): मरौरी ब्लॉक के सभागार में सुबह 11:00 बजे से कार्यशाला प्रारंभ होगी। ​द्वितीय दिवस गोमती उद्गम स्थल पर स्थित सभागार में विशेषज्ञों और स्थानीय समुदाय के बीच कार्यशाला होगी। इस कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्साधिकारी, उप जिलाधिकारी, और विद्युत विभाग सहित जिले के 12 से अधिक प्रमुख विभागों के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। क्षेत्रीय वन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने रेंज से ‘बाघ मित्रों’ और हाथी प्रभावित क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों को अनिवार्य रूप से साथ लेकर आएं, ताकि धरातल पर काम करने वाले लोगों तक विशेषज्ञ की राय सीधे पहुँच सके।
विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार का मानना है कि हाथी एक समझदार प्राणी है। यदि हम उनके रास्ते और व्यवहार का सम्मान करें, तो संघर्ष को 90% तक कम किया जा सकता है। कार्यशाला में हाथियों को बिना नुकसान पहुँचाए खेतों से दूर रखने के पारंपरिक और आधुनिक तरीकों पर लाइव डेमो भी दिए जा सकते हैं।
वन विभाग की यह पहल न केवल पीलीभीत में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाएगी, बल्कि किसानों की फसलों और ग्रामीणों के जीवन की सुरक्षा के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेगी।

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