वाशिंगटन (अमेरिका)। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया गया है। अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अमानवीय अत्याचारों को आधिकारिक तौर पर “युद्ध अपराध और नरसंहार” (War Crimes and Genocide) के रूप में मान्यता दी जाए।
क्या है 1971 के अत्याचारों का काला सच?
प्रस्ताव में उन भयावह घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जब 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सैन्य ताकतों ने ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के नाम पर लाखों बंगाली हिंदुओं की हत्या की थी और लाखों महिलाओं के साथ बर्बरता की थी। सांसद लैंड्समैन ने जोर देकर कहा कि यह मानवता के खिलाफ एक सुनियोजित अपराध था, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जमात-ए-इस्लामी की भूमिका पर प्रहार
प्रस्ताव में विशेष रूप से पाकिस्तानी सेना के कट्टरपंथी सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी की भूमिका को रेखांकित किया गया है। आरोप है कि इस संगठन ने स्थानीय स्तर पर हत्याओं और अत्याचारों में सेना का साथ दिया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य इन घटनाओं को वैश्विक स्तर पर ‘नरसंहार’ के रूप में दर्ज करना है, ताकि इतिहास के साथ न्याय हो सके।
कूटनीतिक मायने
इस कदम को वैश्विक राजनीति में पाकिस्तान के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा और 1971 के पीड़ितों के परिवारों को एक बड़ी नैतिक जीत मिलेगी। भारतीय और बांग्लादेशी समुदायों ने इस पहल का स्वागत किया है।
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