आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के फरिहा गांव इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में एक युवक के शव को दफनाने के तीन दिन बाद वापस बाहर निकाला गया है। मृतक की पहचान शमशाद के रूप में हुई है, जिसकी एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
बिना कानूनी कार्रवाई के दफनाने का पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले एक सड़क दुर्घटना में शमशाद की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के बाद, कानूनी पचड़ों और पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए दोनों पक्षों के बीच कथित तौर पर एक आपसी समझौता हो गया था। इस समझौते के आधार पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना और बिना पोस्टमार्टम कराए ही शमशाद के शव को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार स्थानीय कब्रिस्तान में दफन कर दिया था।

समझौता टूटा या पुलिस को मिली भनक?
सूत्रों के मुताबिक, शव दफनाने के बाद इस मामले में कुछ कानूनी पेच या आपसी विवाद दोबारा गहरा गया, जिसके बाद मामला पुलिस प्रशासन के संज्ञान में आया। चूंकि बिना पोस्टमार्टम और पुलिस पंचनामा के सड़क हादसे के शव को दफनाना गैर-कानूनी है, इसलिए प्रशासन ने इस पर कड़ा रुख अपनाया।
मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में निकाला गया शव
आज रविवार को जिला प्रशासन की अनुमति और नियुक्त किए गए मजिस्ट्रेट की देखरेख में भारी पुलिस बल फरिहा गांव के कब्रिस्तान पहुँचा। पूरे सम्मान और वीडियोग्राफी के साथ शमशाद के शव को कब्र से बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव को तुरंत अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की आधिकारिक वजह साफ होगी। पुलिस अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि वह कौन सा अज्ञात वाहन था जिसने शमशाद को टक्कर मारी थी और किन लोगों के दबाव में आकर परिजनों ने बिना कानूनी प्रक्रिया के शव को दफनाया था। मामले में दोषियों के खिलाफ उचित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।