नई दिल्ली | दिल्ली पुलिस के उत्तर-पूर्वी जिले की साइबर थाना पुलिस ने एक बेहद शातिर साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। आरोपियों ने एक खतरनाक मोबाइल एप्लीकेशन (APK फाइल) के जरिए 65 वर्षीय बुजुर्ग के स्मार्टफोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर उनके बैंक खातों से ₹10.52 लाख की मोटी रकम साफ कर दी थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में ₹2.05 लाख की रकम को बैंक स्तर पर फ्रीज भी करवा दिया है।

व्हाट्सएप कॉल पर KYC अपडेट का दिया झांसा
पुलिस कमिश्नर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली के मीट नगर निवासी पीड़ित राकेश कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 25 अप्रैल 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए पीड़ित को डराया कि उनका बैंक अकाउंट ब्लॉक होने वाला है और इसे बचाने के लिए तुरंत KYC अपडेट करना होगा। शातिर ठग ने व्हाट्सएप पर एक अज्ञात फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने को कहा। पीड़ित ने जैसे ही उस फाइल को इंस्टॉल किया, उनके बैंक खातों से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹10,52,938 पार कर दिए गए।

डिजिटल ट्रेल का पीछा करते हुए धनबाद पहुंची दिल्ली पुलिस
राकेश कुमार की शिकायत के आधार पर साइबर थाना उत्तर-पूर्व में ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई। एसएचओ (SHO) इंस्पेक्टर राहुल कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने तकनीकी जांच, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट्स का बारीकी से विश्लेषण किया। इस डिजिटल ट्रेल के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम ने झारखंड के धनबाद में छापेमारी कर मुख्य आरोपी अमरनाथ रबीदास (20 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन बरामद हुए।

पूछताछ के बाद दूसरा साथी भी गिरफ्तार
अमरनाथ से कड़ाई से की गई पूछताछ के बाद उसने इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड और अपने साथी विकास रबीदास (21 वर्ष) का नाम उगला। पुलिस ने त्वरित दबिश देकर विकास को भी दबोच लिया और उसके पास से एक अन्य मोबाइल फोन बरामद किया।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लोगों को निशाना बनाने के लिए ‘रिमोट एक्सेस मैलवेयर’ वाली जाली APK फाइलें भेजता था। जैसे ही कोई यूजर उसे डाउनलोड करता, पीड़ित के मोबाइल के सारे मैसेज, ओटीपी (OTP) और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स सीधे ठगों के पास पहुंच जाते थे। इसके बाद ये लोग बैंक खातों से रकम दूसरे फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लेते थे और तुरंत एटीएम (ATM) के जरिए कैश निकाल लेते थे। बरामद किए गए मोबाइलों की फॉरेंसिक जांच में देश भर की पांच अन्य राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की शिकायतें भी लिंक्ड मिली हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और इनके अन्य साथियों की तलाश में जुटी है।

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